जयपुर, 11 मार्च (भाषा) राजस्थान में एक थाने के कर्मियों ने वहां काम करने वाली सफाई कर्मचारी की दो बेटियों की शादी में ‘भात’ भरकर मिसाल कायम की है। उन्होंने इस शादी में महिला के पीहर पक्ष के ओर से तय यह रस्म निभायी।
दरअसल कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर थाने में ललिता देवी लगभग चालीस साल से सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती हैं।
थानाधिकारी रोहिताश ने ‘भाषा’ को बताया कि ललिता देवी नारायणपुर के वाल्मीकि मोहल्ला में अपने पीहर में ही रहती है और उनके भाई नहीं है।
रोहिताश के अनुसार ललिता ने हाल में अपनी दो बेटियों की शादी तय की तो उन्हें नहीं पता था उसकी बेटियों का ‘मायरा (भात)’ भरने कौन आएगा।
राजस्थान में ‘भात’ या ‘मायरा’ किसी भी शादी विवाह का एक प्रमुख रस्म है। इसमें दुल्हन या दूल्हे के मामा अपनी बहन के बच्चों की शादी में शामिल होने आते हैं और उसे यथोचित उपहार, वस्त या नकदी देते हैं। जिस महिला की संतान की शादी होती है उसके लिए यह रस्म बड़े चाव वाली होती है।
थानाधिकारी ने बताया कि जब यह बात सामने आई तो उपमहानिरीक्षक एवं जिला पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र विश्नोई के मार्गदर्शन में थाने ने ही ललिता के भाई की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि इन लड़कियों की शादी से एक दिन पहले मंगलवार को गाजे-बाजे के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान, वृत्ताधिकारी मेधा गोयल और थानाधिकारी रोहिताश थाने के सभी कर्मियों को लेकर ललिता देवी के घर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों ने ललिता के भाई का फर्ज निभाते हुए रस्म के तौर पर 1,61,000 रुपए नगदी, दो सिलाई मशीनें, दोनों बेटियों के लिए 5-5 जोड़ी कपड़े और सम्पूर्ण परिवार के लिए नए वस्त्र और अन्य जरूरी सामान उपहार के रूप में दिया।
थानाधिकारी के अनुसार जब पुलिस अधिकारी और जवान सिर पर साफा बांधकर मायरा लेकर पहुंचे तो ललिता देवी की आंखें छलक आईं। पुलिसकर्मियों के इस मानवीय चेहरे की खूब चर्चा है।
भाषा पृथ्वी राजकुमार
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