रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में आईएनएस महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में आईएनएस महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में आईएनएस महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल किया
Modified Date: July 11, 2026 / 01:12 pm IST
Published Date: July 11, 2026 1:12 pm IST

विशाखापत्तनम, 11 जुलाई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को ‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत निर्मित छठे स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ को यहां भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल किया। यह भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

बंदरगाह शहर स्थित नौसैनिक डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में वरिष्ठ नौसेना अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

पूर्वी नौसेना कमान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘आईएनएस महेंद्रगिरि हवा से आने वाले खतरों, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘‘ब्लू-वॉटर’ युद्धपोत के रूप में यह न केवल तट के पास, बल्कि दूर और गहरे समुद्री क्षेत्रों में भी लगातार कई सप्ताह तक तैनात रहकर भारत के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है।’’

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), भारतीय नौसेना, आईएनएस महेंद्रगिरि के चालक दल और देशवासियों को बधाई देते हुए सिंह ने कहा कि यह युद्धपोत भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

करीब 6,670 टन के कुल वजन और 28 नॉट (करीब 52 किलोमीटर प्रति घंटे) की अधिकतम गति वाला आईएनएस महेंद्रगिरि एक बहुउद्देशीय स्टील्थ युद्धपोत है, जो समुद्र में कई अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इसमें उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, हमलों को झेलने और युद्ध में टिके रहने की बेहतर क्षमता, रडार पर कम दिखाई देने की विशेषता तथा उच्च स्तर की स्वचालित प्रणालियां शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। यह भारत की डिजाइन क्षमता, विनिर्माण उत्कृष्टता और देश के मजबूत होते रक्षा परिवेश को दर्शाता है।

आईएनएस महेंद्रगिरि को सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया जा सकता है, जो दुनिया की सबसे तेज और घातक क्रूज मिसाइलों में शामिल है।

यह युद्धपोत बहुउद्देशीय रडार, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और नजदीकी खतरों से रक्षा करने वाली हथियार प्रणाली से भी लैस है।

सिंह ने कहा कि यह युद्धपोत हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकता है। इसके अलावा, यह समुद्री सुरक्षा मिशन, खोज एवं बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान तथा हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे लंबे समय तक तैनाती जैसे मिशन भी पूरा करने में सक्षम है।

इसे ‘ब्लू-वॉटर युद्धपोत’ बताते हुए सिंह ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरि हवा से आने वाले खतरों, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का मुकाबला कर सकता है। साथ ही, यह भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए न केवल तटीय क्षेत्रों के पास, बल्कि दूर और गहरे समुद्र में भी कई सप्ताह तक लगातार तैनात रह सकता है।

पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर इस युद्धपोत का नाम रखा गया है। यह ‘महेंद्रगिरि’ नाम वाला भारतीय नौसेना का पहला पोत है।

युद्धपोत के प्रतीक चिह्न का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि इसमें महेंद्रगिरि पर्वत के शिखर पर बैठे एक शिकरे (गोशॉक पक्षी) को दर्शाया गया है। यह पैनी दृष्टि, असाधारण धैर्य और निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता का प्रतीक है, ऐसे गुण जिनकी अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक युद्धपोत से अपेक्षा की जाती है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और मजबूत हुई है। यह स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में भारत के एक अग्रणी देश के रूप में उभरने को भी रेखांकित करता है। साथ ही, इससे हिंद महासागर क्षेत्र में एक पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और सुरक्षित, स्थिर तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत हुई है।

भाषा गोला रंजन

रंजन


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