जोरहाट (असम), 18 जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की और कहा कि यह भाजपा-आरएसएस की 50 साल पुरानी राजनीतिक परियोजना है।
जोरहाट जिले के पुथिनाडी में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को स्वीकार नहीं करने के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के रुख का बचाव किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कार्यक्रम (प्राण प्रतिष्ठा समारोह) भाजपा-आरएसएस की 50 साल पुरानी राजनीतिक परियोजना है। इसके निर्माता, निर्देशक, मुख्य अभिनेता, एकमात्र अभिनेता, संगीत निर्देशक हमारे प्रधानमंत्री हैं। यह निरंकुशता है और हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।’’
‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान नगालैंड में राहुल गांधी के संवाददाता सम्मेलन का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि कांग्रेस धर्म विरोधी नहीं है लेकिन वह सभी धर्मों का सम्मान करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम विभिन्न धर्मों में लोगों की आस्था का सम्मान करते हैं। यात्रा एक बहु-मंदिर, बहु-धार्मिक कार्यक्रम है। यात्रा लोकतंत्र की शहनाई बजाती है।’’
प्राण प्रतिष्ठा समारोह को एक राजनीतिक सम्मेलन करार देते हुए रमेश ने कहा कि कांग्रेस इस राजनीतिक योजना, समारोह और निमंत्रण का हिस्सा बनने की स्थिति में नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘धर्म एक व्यक्तिगत मुद्दा और आस्था है। हर किसी की अलग-अलग धर्मों में आस्था है। हम एक बहु-धार्मिक, बहु-भाषाई और बहु-क्षेत्रीय समाज हैं। हमारा संविधान और लोकतंत्र ‘‘विविधता में एकता’’ पर आधारित है।’’
गांधी का हवाला देते हुए रमेश ने कहा कि कांग्रेस किसी को भी मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर जाने से नहीं रोक सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर लोगों की आस्था के कारण बनते रहेंगे। चार बड़े धर्मों की उत्पत्ति इसी भूमि से हुई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें नरेन्द्र मोदी या अमित शाह से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में वे धर्म विरोधी हैं, वे धर्म का अर्थ नहीं जानते हैं। राजनीति के लिए धर्म का उपयोग करना धर्म के साथ-साथ राजनीति के भी खिलाफ है। यह धर्म को नीचा दिखाता है।’’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी ने 10 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के निमंत्रण को ‘‘ससम्मान अस्वीकार’’ कर दिया था और भाजपा-आरएसएस पर चुनावी लाभ के लिए इसे ‘‘राजनीतिक परियोजना’’ बनाने का आरोप लगाया था।
‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा, ‘‘यह एक राजनीतिक दल की रैली है। यह एक राजनीतिक रैली है। लेकिन यह वोट मांगने वाली चुनावी रैली नहीं है। यह विचारधारा और अन्याय के बारे में है।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘अमृत काल’ की बात करते हैं जबकि यात्रा देश भर में हो रहे अन्याय के बारे में बात करेगी।
रमेश ने कहा, ‘‘भाजपा-आरएसएस का एकमात्र एजेंडा ध्रुवीकरण है। वे पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों में ध्रुवीकरण करना चाहते हैं। उन्होंने असम में परिसीमन केवल इसी उद्देश्य से किया।’’
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव-सह-असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा राज्य को धर्म, समुदाय, जाति और भाषा के नाम पर विभाजित करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में यात्रा 14 जनवरी को मणिपुर से शुरू हुई और 20 मार्च को मुंबई में समाप्त होगी।
बृहस्पतिवार सुबह शुरू हुआ यात्रा का असम चरण 25 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान राज्य के 17 जिलों में 833 किलोमीटर की यात्रा की जाएगी।
यात्रा के तहत 15 राज्यों के 110 जिलों में 67 दिनों में 6,713 किलोमीटर की दूरी तय करने की योजना है।
भाषा सुरभि रंजन
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