पुरी के जगन्नाथ मंदिर में चूहों के लिए लगाए जाएंगे पिंजरे, जिंदा पकड़कर बाहर छोड़ा जाएगा

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पुरी के जगन्नाथ मंदिर में चूहों के लिए लगाए जाएंगे पिंजरे, जिंदा पकड़कर बाहर छोड़ा जाएगा

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  • Publish Date - August 31, 2026 / 01:58 PM IST,
    Updated On - August 31, 2026 / 01:58 PM IST

पुरी (ओडिशा), 31 अगस्त (भाषा) पुरी में 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में चूहों और तिलचट्टों के बढ़ते प्रकोप से निपटने के लिए पारंपरिक कीट नियंत्रण उपाय अपनाए जाएंगे। मंदिर के अंदर किसी भी जानवर या कीड़े को मारने पर स्पष्ट रोक होने के कारण चूहों को जाल या पिंजरे में फंसाकर जिंदा पकड़ने और बाहर छोड़ने का फैसला किया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने हाल में इस मुद्दे पर हुई बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्राचीन मंदिर में चूहों की समस्या नई नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के दौरान यह समस्या गंभीर हो गई थी, जब श्रद्धालुओं की संख्या कम थी। 2023 में पारंपरिक कीट नियंत्रण उपाय अपनाए गए थे… लेकिन अब इनकी संख्या फिर बढ़ गई है और इसी तरह के उपाय दोबारा किए जाएंगे।’’

पुरी के जिलाधिकारी और एसजेटीए के उप मुख्य प्रशासक दिव्य ज्योति परीदा ने कहा कि इस मुद्दे पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से भी सलाह ली गई है।

उन्होंने बताया कि तिलचट्टों को आकर्षित कर पकड़ने के लिए गर्भगृह में गुड़ और अन्य चिपचिपे पदार्थों से युक्त मिट्टी के बर्तन रखे गए हैं।

गर्भगृह में चूहों और तिलचट्टों के प्रवेश के रास्तों को भी बंद किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि चूहे देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूलों को खा जाते हैं और उनके कीमती वस्त्रों को कुतर देते हैं।

चूहों को भगाने के लिए जहरीले स्प्रे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे चूहों और तिलचट्टों के मंदिर के अंदर मरने की आशंका है, जो मंदिर के नियमों के खिलाफ है।

जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता भास्कर मिश्रा ने कहा, ‘‘चूहे ‘गर्भ गृह’ में परेशानी पैदा करते हैं, लेकिन सेवकों को मंदिर के अंदर जानवरों को मारने या उन्हें जहर देने की अनुमति नहीं है। मंदिर के अधिकार अभिलेख (आरओआर) में मंदिर परिसर में चूहों, चमगादड़ों और बंदरों से निपटने का प्रावधान है।’’

उन्होंने कहा कि मंदिर के नियमों के अनुसार किसी भी जीवित प्राणी की जान नहीं ली जा सकती।

उन्होंने कहा कि जगन्नाथ मंदिर परिसर में कुछ जानवर पीढ़ियों से रह रहे हैं क्योंकि उन्हें बचा हुआ पर्याप्त ‘महाप्रसाद’ मिल जाता है।

मिश्रा ने कहा कि मंदिर के अधिकार अभिलेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कुछ विशेष सेवकों को चूहों को जिंदा पकड़कर मंदिर परिसर से बाहर छोड़ने की जिम्मेदारी दी जाती है।

भाषा

मनीषा वैभव

वैभव