शिवसेना (उबाठा) में बगावत भाजपा की योजना ताकि संसद में राजग की संख्या बढ़ाई जा सके : दानवे
शिवसेना (उबाठा) में बगावत भाजपा की योजना ताकि संसद में राजग की संख्या बढ़ाई जा सके : दानवे
छत्रपति संभाजीनगर, 19 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता अंबादास दानवे ने शुक्रवार को पार्टी में हो रही बगावत के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जिम्मेदार ठहराया।
दानवे ने आरोप लगाया कि शिवसेना(उबाठा) में बगावत भाजपा की ‘साजिश’ है क्योंकि वह संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का संख्याबल बढ़ाना चाहती है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2029 के आम चुनाव में संभावित हार को लेकर डरी हुई है।
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (उबाठा) को गत चार साल में दूसरी बड़ी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
इन सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाखचौरे, नागेश पाटिल-अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निम्बालकर शामिल हैं । इन सभी सांसदों ने बृहस्पतिवार को बुलाई गई शिवसेना (उबाठा) की संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने ठाकरे के नेतृत्व से दूरी बना ली है।
दानवे ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘इस पूरी योजना के पीछे भाजपा है, लेकिन एकनाथ शिंदे को इसका चेहरा बनाया गया है। यह योजना संसद में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए बनाई गई , ताकि वह परिसीमन संबंधी विधेयक को पारित करा सकें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा को डर है कि 2029 के लोकसभा चुनावों में जनता जनादेश वापस ले सकती है। शिवसेना(उबाठा) के सांसदों को लेकर जो गतिविधियां चल रही हैं, वे संसद में विधेयक पारित कराने की योजना का ही हिस्सा हैं। योजना पर अमल पुख्ता करने के लिए भाजपा इस तरीके से सांसदों को अपने पाले में कर रही है। उसे किसी भी पार्टी के सांसदों से कोई लगाव नहीं है, लेकिन हमारी पार्टी के सांसदों को लेकर हो रही यह सारी जोड़-तोड़ इसी योजना का हिस्सा है।’’
छत्रपति संभाजीनगर निवासी दानवे ने दावा किया कि छह सांसदों के इस समूह में से कुछ ने पिछले साल ही (पार्टी बदलने का) फैसला कर लिया था।
उन्होंने दावा किया, ‘‘एक साल पहले असंतोष देखा गया था। सितंबर 2025 में कुछ सदस्यों ने अलग फैसला लिया। लेकिन वे छह की संख्या (दल-बदल विरोधी क़ानून के तहत अयोग्य होने से बचने के लिए जरूरी सांसद तक नहीं पहुंच पाए। जब वह संख्या पूरी हो गई, तो सत्तारूढ़ दलों ने योजना पर अमल शुरू किया।’’
दानवे से जब सवाल किया गया कि क्या पार्टी की बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, तो उन्होंने कहा, ‘‘इस पर बड़े पैमाने पर चर्चा नहीं हुई थी। लेकिन जब कोई कहता है कि वे हमारे साथ हैं, तो हम उन पर अविश्वास नहीं जता सकते।’’
शिवसेना(उबाठा) से बगावत करने वाले छह सांसदों में से तीन मराठवाड़ा क्षेत्र से हैं।
नागेश पाटिल आष्टीकर ने 2024 में पहली बार हिंगोली से लोकसभा सीट जीत दर्ज की थी, जबकि संजय जाधव तीसरी बार परभणी लोकसभा सीट से विजयी हुए। वहीं, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर 2024 में धाराशिव लोकसभा सीट से दूसरी बार विजेता बने थे।
इससे पहले, शिवसेना (उबाठा)के प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने आरोप लगाया था कि पवन राजे निंबालकर हत्या मामले में फैसले को लेकर धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर पर दबाव डाला जा रहा था। राउत का दावा है कि सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने के लिए राजे निंबालकर को उनके पिता की हत्या मामले में ‘अनुकूल फैसले’ का प्रलोभन दिया गया।
दानवे ने कहा कि अगर ऐसा कोई दबाव है, तो यह खतरनाक परिपाटी है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी पर दबाव डालने के लिए अदालती मामलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह किसी भी पार्टी से सांसदों को तोड़ने से भी ज़्यादा खतरनाक है।’’
भाषा धीरज रंजन
रंजन

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