लाल किला विस्फोट के आरोपी अगस्त में गये थे लखनऊ, कई विस्फोट की थी साजिश : एनआईए

लाल किला विस्फोट के आरोपी अगस्त में गये थे लखनऊ, कई विस्फोट की थी साजिश : एनआईए

लाल किला विस्फोट के आरोपी अगस्त में गये थे लखनऊ, कई विस्फोट की थी साजिश : एनआईए
Modified Date: May 25, 2026 / 06:01 pm IST
Published Date: May 25, 2026 6:01 pm IST

(अश्विनी श्रीवास्तव)

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) लाल किले में हुए कार विस्फोट मामले में एनआईए की जांच से आरोपियों द्वारा लखनऊ में सिलसिलेवार आतंकी हमले करने की एक भयावह साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें विधानसभा और अन्य प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया जाना था जहां लोगों की आवाजाही अधिक होती है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि दो मुख्य आरोपी – डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद – इस आतंकी साजिश के लिए एक “सुनियोजित टोही यात्रा” के तहत 25 से 30 अगस्त, 2025 के बीच हरियाणा के फरीदाबाद से लखनऊ गए थे।

सूत्रों के अनुसार, मुजम्मिल ने उत्तर प्रदेश में सरकार के प्रतीक माने जाने वाले विभिन्न ठिकानों की गुप्त जासूसी की। उसने विधानसभा, बापू भवन (सचिवालय) और इमामबाड़ा, लाल बाग और अमीनबाद जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी की।

आरोपियों ने इन स्थानों को अपने मिशन के लिए उपयुक्त लक्ष्य माना। एक सूत्र ने बताया, “वे इन भवन परिसरों के पास विस्फोटकों से भरी कार में विस्फोट करने की साजिश रच रहे थे।”

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी मुजम्मिल ने अपने फोन का इस्तेमाल लखनऊ में उन रासायनिक दुकानों को खोजने के लिए किया था, जिनमें ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) के निर्माण के लिए आवश्यक दो पूर्ववर्ती रसायन मौजूद थे। टीएटीपी एक अत्यधिक अस्थिर पेरोक्साइड विस्फोटक है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘शैतान की मां’ के रूप में जाना जाता है और जिसका इस्तेमाल पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले में हुए कार विस्फोट में किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, शाहीन ने मुजम्मिल के निर्देशों पर इन संबंधित दुकानों के नाम अपनी लिखावट में लिखे थे – यह सूची बाद में एनआईए ने उसके फोन से बरामद की।

दोनों लखनऊ में शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर रुके थे। उन्होंने बताया कि शाहीन का पैतृक घर, जहां उनके पिता अलग रहते हैं, खांदारी बाजार, लाल बाग में स्थित है।

सूत्रों के अनुसार, मुजम्मिल ने लखनऊ के रहने वाले और शहर से परिचित एक “गवाह” से इन दुकानों पर जाकर बड़ी मात्रा में रसायनों की उपलब्धता के बारे में व्यक्तिगत रूप से पूछताछ करने को कहा।

उन्होंने बताया कि मुजम्मिल ने इस गवाह को इसलिए शामिल किया क्योंकि वह स्थानीय निवासी था और बिना संदेह पैदा किए पूछताछ कर सकता था, जबकि मुजम्मिल को तुरंत एक बाहरी व्यक्ति के रूप में पहचाना जा सकता था।

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने शहर के एक सुनसान इलाके में भी ऐसी जगह की तलाश की, जहां वे गुप्त रूप से विस्फोटक बनाने की अपनी गतिविधियां चला सकें, ठीक उसी तरह जैसे वे फरीदाबाद के खोड़ी जमालपुर स्थित किराए के मकान में कर रहे थे।

एनआईए ने कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और तकनीकी विश्लेषण सहित विस्तृत जांच के माध्यम से, वित्तीय लेन-देन का पता लगाकर, लखनऊ यात्रा के दौरान घटी घटनाओं का पूरा क्रम स्थापित किया है।

ये निष्कर्ष एनआईए द्वारा 14 मई को दाखिल किये गए 7,500 पृष्ठों की विस्तृत आरोपपत्र का हिस्सा हैं, जो पिछले साल 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी को हिला देने वाले उच्च तीव्रता वाले वाहन-जनित आईईडी विस्फोट के संबंध में है।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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