नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के जयपुर पोलो ग्राउंड और रेस कोर्स इलाके के आसपास बीआर कैंप झुग्गियों में ध्वस्तीकरण से जुड़ी गतिविधियों के बाद वहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों ने शुक्रवार को कहा कि वे इस डर के साये में जी रहे हैं कि उनके सिर से छत छिन सकती है।
अधिकारियों ने कहा कि वे दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए यह कार्रवाई कर रहे हैं।
झुग्गी-बस्ती में रहने वाले 700 से ज्यादा परिवारों में कई ने एकल न्यायाधीश के 11 मई के आदेश को चुनौती दी है।
निवासियों ने कहा कि उन्हें लगभग 45 किलोमीटर दूर सावदा घेवरा में बसाए जाने से उनकी आजीविका छिन जाएगी, क्योंकि उनमें से ज्यादातर लोग अभी प्रधानमंत्री आवास के पास अपने मौजूदा कैंपों के नजदीक श्रम आधारित नौकरियां करते हैं।
निवासियों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि कई निवासियों ने कई परिवारों ने झुग्गी तोड़े जाने की आशंका के चलते दरवाजे, खिड़कियां, टीन की चादरें और अन्य सामान हटाना शुरू कर दिया है।
बीआर कैंप झुग्गियों में रहने वाले शान खान ने कहा, “हम अंग्रेजों के जमाने से यहां रह रहे हैं और अब अधिकारी हमसे जाने के लिए कह रहे हैं। हमारे परिवार पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। लोग यहीं पैदा हुए और यहीं उनकी मौत हुई।”
उसने कहा, “कई परिवार पहले ही जा चुके हैं। यह देखने के लिए झुग्गियों के ताले तोड़े जा रहे हैं कि क्या कोई अब भी अंदर है। जब झुग्गी खाली मिलती है, तो उसे गिरा दिया जाता है।”
खान ने दावा किया कि लगभग 300 परिवार पहले ही सावदा घेवरा जा चुके हैं और कैंप में सिर्फ वे परिवार रह रहे हैं, जिन्होंने अदालत का रुख किया है।
निवासियों ने कहा कि बेदखली की यह कार्रवाई उन्हें दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके खिलाफ वे मार्च से ही कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
भाषा पारुल माधव
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