डीआरडीओ से जुड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघन की खबरें ‘गलत और अपुष्ट’: अधिकारी

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डीआरडीओ से जुड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघन की खबरें ‘गलत और अपुष्ट’: अधिकारी

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 09:18 AM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 09:18 AM IST

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने उससे जुड़े कथित साइबर सुरक्षा उल्लंघन को लेकर मीडिया में आईं खबरों को ‘‘गलत और अपुष्ट’’ बताया है।

डीआरडीओ के अधिकारियों ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि फिलहाल ‘‘किसी भी सक्रिय साइबर हमले का कोई प्रमाण नहीं मिला है।’’

मीडिया में आई कुछ खबरों में दावा किया गया था कि डीआरडीओ के डेटा में सेंध लगी है और एक संदिग्ध साइबर अपराधी कथित रूप से बड़ी मात्रा में डेटा ‘डार्क वेब’ पर बेचने की कोशिश कर रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि इस कथित डेटा उल्लंघन की रक्षा मंत्रालय के स्तर पर संबंधित एजेंसियों द्वारा गहन जांच की गई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि फिलहाल किसी भी सक्रिय साइबर हमले, नेटवर्क में अनधिकृत घुसपैठ या अवैध तरीके से डेटा हासिल करने का कोई सबूत नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि डीआरडीओ से जुड़े कथित साइबर सुरक्षा मामले पर मीडिया के कुछ वर्गों में प्रकाशित रिपोर्टें ‘‘गलत और अपुष्’’’ हैं।

अधिकारियों के अनुसार, जिस डेटा के लीक होने का दावा किया जा रहा है, उसका अधिकांश हिस्सा ‘‘गैर-गोपनीय है और उसमें कोई संवेदनशील या गोपनीय जानकारी शामिल नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि जिस गैर-गोपनीय डेटा को ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण’’ बताकर पेश किया जा रहा है, वह वास्तव में 2020 से 2022 के बीच हुए एक पुराने डेटा उल्लंघन से संबंधित है और साइबर अपराधियों ने जानबूझकर दस्तावेज़ों में हेरफेर कर उन्हें ‘‘नया और गोपनीय’’ दिखाने की कोशिश की है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि कथित डेटा लीक में जिन दस्तावेज का जिक्र किया जा रहा है वे पुराने हैं और वे अब डीआरडीओ की वर्तमान प्रणालियों या संरचनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

जांच में यह भी सामने आया है कि कई साइबर अपराधी एक ही डेटा को बिक्री के लिए पेश कर रहे हैं। हालांकि, उनके पास मौजूद डेटा एक जैसा है और उसका वर्तमान में न तो डीआरडीओ के लिए कोई महत्व है और न ही रक्षा मंत्रालय के लिए ।

भाषा शोभना सिम्मी

सिम्मी