बिरला के खिलाफ संकल्प: विपक्ष ने जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर सवाल उठाए

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बिरला के खिलाफ संकल्प: विपक्ष ने जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर सवाल उठाए

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 02:07 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 02:07 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) विपक्ष दलों ने मंगलवार को लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता जगदंबिका पाल के पीठासीन होने पर सवाल उठाए और नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वह सदन का संचालन नहीं कर सकते क्योंकि बिरला ने उनकी नियुक्ति की है।

हालांकि, पाल ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं हुआ है और ऐसे में इस विषय को लेकर व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष ने जिन नियमों का हवाला दिया, वो सदन संचालित करने से संबंधित हैं और विपक्ष द्वारा उनकी गलत व्याख्या की जा रही है।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने बिरला के खिलाफ संकल्प सदन में प्रस्तुत किया।

संकल्प पेश किए जाने से पहले एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा की कार्य प्रक्रिया के नियम 376 और संविधान के अनुच्छेद 96 का हवाला देते हुए कहा कि ओम बिरला ने जगदंबिका पाल की नियुक्ति की है, ऐसे में पाल पीठासीन सभापति की भूमिका का निर्वहन नहीं कर सकते।

कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल ने ओवैसी की बात का वस्तुत: समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि इस सरकार ने लोकसभा उपाध्यक्ष का निर्वाचन नहीं किया है और संवैधानिक शून्यता की स्थिति पैदा की है।

उनका कहना था कि सदन को एक व्यक्ति का चयन करना चाहिए जो कार्रवाई का संचालन करे।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने इसी राय का समर्थन किया।

संकल्प पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने भी पाल के अधिकार को लेकर सवाल उठाए।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जो भी आसन पर होगा उसे अध्यक्ष की तरह अधिकार होगा।

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सदन के नियम के तहत जिन्हें पीठासीन सभापति नियुक्त किया गया है उन्हें सदन के संचालन का पूरा अधिकार है।

उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के लोग चर्चा करने से भाग रहे हैं।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि जिस विषय पर आसन से आदेश दे दिया गया है, उस पर व्यवस्था का प्रश्न उठाया गया, जो उचित नहीं है।

पाल ने कहा कि अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं है और ऐसे में व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकसभा भंग भी हो जाए, तब भी अध्यक्ष का पद खाली नहीं रहता।

भाषा हक हक वैभव

वैभव

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