तिरुवनंतपुरम, 10 अगस्त (भाषा) तिरुवनंतपुरम की एक अदालत ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ नयी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के बारे में कथित रूप से की गईं टिप्पणियों के मामले में गिरफ्तार दक्षिणपंथी राजनीतिक टिप्पणीकार टी जी मोहनदास को सोमवार को जमानत दे दी।
तिरुवनंतपुरम की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत के न्यायाधीश मिथुन गोपी जी. एस. ने मोहनदास को अदालत में पेश किए जाने के बाद जमानत दे दी।
मोहनदास की गिरफ्तारी सोमवार सुबह दर्ज की गई। उन्हें रविवार शाम कोच्चि के मट्टनचेरी स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था।
दक्षिणपंथी टिप्पणीकार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और केरल पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मोहनदास को अदालत में पेश किए जाने के समय उनके वकील ने जमानत याचिका दाखिल की।
अभियोजन पक्ष ने विस्तृत जांच के लिए आरोपी की हिरासत मांगी और आशंका जताई कि वह प्रभावशाली व्यक्ति हैं तथा जमानत पर रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं तथा सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
हालांकि, बचाव पक्ष ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया और कहा कि मोहनदास पर लगाए गए सभी आरोपों में जमानत का प्रावधान है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।
अदालत ने जांच के सिलसिले में मोहनदास को तीन दिन तक जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। उन्हें निर्देश दिया गया कि जब भी पुलिस को जरूरत हो, वह उसके समक्ष पेश हों।
इसने निर्देश दिया कि जमानत पर रहते हुए वह इस तरह का अपराध दोबारा न करें।
यह मामला एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मोहनदास के यूट्यूब चैनल ‘पत्रिका’ पर अपलोड किए गए वीडियो का मकसद सार्वजनिक शांति भंग करना और लोगों के बीच भय व अशांति उत्पन्न करना था।
वीडियो में मोहनदास ने कथित तौर पर कहा था कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन से “बलात्कार की घटनाएं बढ़ने की आशंका” है।
उन्होंने वीडियो में कथित तौर पर दावा किया था कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की जाएगी, क्योंकि “प्रदर्शन में शामिल लोग बलात्कार को पसंद करते हैं और कुछ लड़कियां भी हैं, जो अपने बलात्कार का आनंद लेतीं।”
मोहनदास ने कथित तौर पर यह भी कहा था कि अगर उन्हें जिम्मेदारी दी जाती तो वह कर्फ्यू लगाने और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का आदेश देते तथा अगर प्रदर्शनकारी नहीं मानते तो वह “गोली चलवा देते।”
उन्होंने यह दावा भी किया था कि भले ही इस दौरान कुछ लोग मर जाते या स्थायी रूप से अपंग हो जाते, लेकिन स्थिति कुछ ही घंटों में काबू हो जाती और शवों को अस्पताल भेज दिया जाता।
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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