नदी प्रदूषण : न्यायालय ने राजस्थान को 20-सूत्री समाधान योजना तैयार करने का सुझाव दिया
नदी प्रदूषण : न्यायालय ने राजस्थान को 20-सूत्री समाधान योजना तैयार करने का सुझाव दिया
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) उच्चतम नयायालय ने मंगलवार को राजस्थान सरकार को सुझाव दिया कि राज्य की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में हो रहे प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 20-सूत्री समाधान योजना तैयार की जाए।
जोजरी नदी जोधपुर से होकर गुजरती है, बांडी नदी पाली से बहती है जबकि लूणी नदी बालोतरा से होकर गुजरती है। बांडी और जोजरी नदियां बालोतरा शहर के पास लूणी नदी में मिल जाती हैं।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि पाली का पूरा औद्योगिक क्षेत्र नदी के किनारे स्थित है और दीर्घकाल में राज्य सरकार को उद्योगों को नदी के किनारे से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने पर भी विचार करना पड़ सकता है।
अदालत ने कहा, ‘‘राज्य सरकार एक समाधान योजना लेकर आए।’’
उच्चतम न्यायालय जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था। इसी दौरान अदालत ने बांडी और लूणी नदियों में प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने राजस्थान के मुख्य सचिव से ऑनलाइन माध्यम से बातचीत की। मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार इस समस्या की गंभीरता को पूरी तरह स्वीकार करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हितधारकों से उचित परामर्श के बाद हम विस्तृत कार्ययोजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं।’’
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि राज्य की नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
पीठ ने कहा कि इस मामले में कई एजेंसियां शामिल हैं, इसलिए मुख्य सचिव को अधिकारियों का एक समूह गठित करना चाहिए, जो उच्च स्तरीय पारिस्थितिकी निगरानी समिति के साथ मिलकर काम करे और 20-सूत्री समाधान योजना तैयार करे।
अदालत ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि मुख्य सचिव उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता में बैठक करें और 20-सूत्री समाधान योजना तैयार की जाए।’’
पीठ ने यह भी कहा कि राज्य की सभी नदियों के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
अदालत ने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य इन उद्योगों द्वारा दिए जा रहे रोजगार को समाप्त करना नहीं है, लेकिन यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता।’’
पीठ ने कहा कि इस मामले में सात अगस्त को आदेश जारी करेगी।
पिछले साल नवंबर में, उच्चतम न्यायालय ने तंत्र की बुनियादी कमियों का पता लगाने, प्रदूषण को और बढ़ने से रोकने के लिए जरूरी सुधारात्मक उपायों की निगरानी करने और पहले से हुए नुकसान को ठीक करने के लिए दीर्घकालिक सुझाव देने के मकसद से एक उच्च स्तरीय पारिस्थितिकी निगरानी समिति का गठन किया था।
भाषा शफीक नरेश
नरेश

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