आरकेएस भदौरिया ने राहुल गांधी के ‘घोटाले’ के आरोप को खारिज किया

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आरकेएस भदौरिया ने राहुल गांधी के ‘घोटाले’ के आरोप को खारिज किया

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  • Publish Date - April 30, 2026 / 08:06 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 08:06 PM IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) वायु सेना के पूर्व प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ग्रेट निकोबार परियोजना संबंधी दावों को ‘पूरी तरह गलत’ बताया और कहा कि यह ‘अत्यधिक समन्वित’ पहल भारत के लिए अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखती है।

भदौरिया की ये टिप्पणी राहुल गांधी के उस आरोप के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कैम्पबेल बे में ग्रेट निकोबार परियोजना ‘‘ सबसे बड़े घोटालों में से एक है और देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ गंभीर अपराध है।’’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि इस परियोजना के तहत 160 वर्ग किलोमीटर के वर्षावन में लाखों पेड़ काटे जाएंगे। उन्होंने इसे ‘विकास के वेश में लिपटा विनाश’ बताया और कहा था कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।

आरोपों का जवाब देते हुए भदौरिया ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि ऐसी चिंताएं ‘निराधार’ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ यह एक अत्यधिक समन्वित परियोजना है जो भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके रणनीतिक महत्व के साथ-साथ राष्ट्रीय और स्थानीय विकास में इसकी भूमिका को समझना आवश्यक है।’’

भदौरिया के अनुसार इस परियोजना में लगभग 162 लाख यूनिट की ‘कंटेनर ट्रांस-शिपमेंट’ क्षमता वाला एक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, नागरिक और सैन्य दोनों उपयोग के लिए एक समर्पित रक्षा एन्क्लेव सहित एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, गैस और सौर ऊर्जा के मिश्रण से संचालित 450 मेगावाट का बिजली संयंत्र, तथा लगभग 6.5 लाख निवासियों को समायोजित करने में सक्षम एक नियोजित टाउनशिप शामिल है।

उन्होंने कहा कि यह पहल एक क्षमता-विकास (कैपेसिटी-बिल्डिंग) परियोजना के रूप में कार्य करेगी, जिसका उद्देश्य एक स्मार्ट सिटी का विकास करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर, अगर हम इस परियोजना को देखें तो यह एक अत्यंत समन्वित पहल है जिसका भारत के लिए बहुत महत्व है। हाल की घटनाओं, जैसे कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए घटनाक्रम को देखते हुए, इसे रणनीतिक दृष्टिकोण से समझना बेहद जरूरी है।’’

पूर्व वायु सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘ रणनीतिक रूप से, यह समझना महत्वपूर्ण है कि इससे हमें मलक्का जलडमरूमध्य से महज 150 किलोमीटर दूर स्थित होने की क्षमता प्राप्त होगी। वायु और समुद्री दोनों क्षेत्रों में हमारी समग्र जानकारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।’’

भदौरिया ने कहा, ‘‘मेरी जानकारी के अनुसार, कुल वन क्षेत्र का केवल 1.78 प्रतिशत ही प्रभावित होगा। आदिवासी हित सर्वोपरि हैं और आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए विशेष रूप से समितियां गठित की जा रही हैं..।’’

भाषा शोभना नरेश

नरेश