प्रगति के लिए जड़ों से जुड़ाव जरूरी : डा. विश्वनाथ त्रिपाठी

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प्रगति के लिए जड़ों से जुड़ाव जरूरी : डा. विश्वनाथ त्रिपाठी

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  • Publish Date - August 23, 2026 / 07:57 PM IST,
    Updated On - August 23, 2026 / 07:57 PM IST

नई दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के परम शिष्य डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी ने उनकी जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कि हम वर्तमान में परंपरा को छोड़कर आधुनिकता की तरफ नहीं बढ़ सकते।

डा. त्रिपाठी, आचार्य द्विवेदी की 120वीं जयंती पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा शनिवार को साहित्य अकादेमी में आयोजित ‘हजारी प्रसाद द्विवेदी के ऐतिहासिक गल्प में कल्प-सृष्टि’ विषय पर आयोजित व्याख्यान के दौरान छात्रों एवं साहित्य प्रेमियों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि पंडित जी शव साधना की बात करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘शव साधना क्या है। शव जो है वह हमारा अतीत है और उसे वर्तमान से जोड़कर ही हम भविष्य को देख सकते हैं। उनके पूरे साहित्य में वह कहते थे कि हमारा एक पैर अतीत में, तो दूसरा पैर भविष्य की ओर बढ़ता है। हम वर्तमान में परंपरा को छोड़कर आधुनिकता की तरफ नहीं बढ़ सकते। परंपरा एवं इतिहास हमें देखना होगा, तभी हम आगे बढ़ सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि जीवन में पुष्पित-पल्लवित होने और प्रगति करने के लिए अपनी जड़ों से जुड़ा होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी असफलताओं से घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि असफलताएं भी कभी-कभी बड़ी सफलता की नींव बन जाती हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. नीरज कुमार ने कहा कि आचार्य द्विवेदी जी घटना के नहीं, घटमान के साहित्यकार थे।

उन्होंने आचार्य जी के उपन्यासों में कल्प-सृष्टि, मिथकीय चेतना और लोकतत्व के गहन अंतर्संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आचार्य जी के उपन्यासों के चरित्रों, जैसे बाणभट्ट, निउनिया, भटनी आदि को अपने व्याख्यान के माध्यम से सभागार में एक बार फिर से जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के हिंदी विभाग के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय संबंध के डीन प्रो. अनिल राय ने आचार्य द्विवेदी जी के साहित्य को समझने के लिए धैर्य को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पंडित जी की कल्प-सृष्टि इतिहास का अतिक्रमण नहीं करती, बल्कि रिक्त स्थान की पूर्ति करती है।

व्याख्यान के दौरान “पुनर्नवा” नामक वार्षिक स्मारिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. वेद प्रकाश, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. विनय विश्वास, राजकमल प्रकाशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आमोद महेश्वरी समेत बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

भाषा नरेश सुरेश

सुरेश

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