तिरुवनंतपुरम, 13 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, लेकिन इसे ‘‘सबसे ज्यादा गलत समझा गया’’।
भागवत ने यहां आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि संगठन बाहर से लोगों को एक अर्धसैनिक संगठन जैसा लग सकता है-क्योंकि स्वयंसेवक वर्दी में पथ संचलन करते हैं-या फिर इसे एक अखिल भारतीय व्यायामशाला जैसा भी समझा जा सकता है, क्योंकि यह भारतीय खेलों और मार्शल आर्ट्स को बढ़ावा देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आरएसएस यह सब कुछ नहीं है। संघ को बाहर से समझना कठिन है।’’
भागवत ने कहा, ‘‘आरएसएस को समझने का सबसे अच्छा तरीका है उससे जुड़ना और उसे भीतर से अनुभव करना। हालांकि, ऐसा करने के लिए पहले यह भरोसा होना चाहिए कि उसे परखना और समझना सुरक्षित है। एक व्याख्यान या पुस्तक संघ के बारे में कम से कम उतनी समझ तो प्रदान कर ही सकती है।’’
उन्होंने कहा कि आरएसएस न तो किसी विशेष स्थिति की प्रतिक्रिया है और न ही समाज के किसी वर्ग या राजनीतिक दल के विरोध में है।
भागवत ने कहा, ‘‘क्योंकि आरएसएस को अक्सर गलत समझा गया, इसलिए उसने अपने शताब्दी समारोहों के तहत लोगों तक पहुंच बनाने और संगठन तथा उसके कार्यों को समझाने का निर्णय लिया है।’’
उन्होंने कहा कि संघ राष्ट्र के कल्याण में योगदान देने और देश की सेवा से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अस्तित्व में आया था।
भाषा देवेंद्र संतोष
संतोष