नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि लगभग चार दशक पहले श्रीलंका में ‘ऑपरेशन पवन’ के दौरान भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए बलिदान को सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने इस दौरान 1990 के दशक की सरकारों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उस समय सैनिकों के योगदान को सार्वजनिक रूप से पर्याप्त मान्यता नहीं दी गई।
सिंह ने कहा कि मोदी सरकार न केवल “खुले दिल” से इस अभियान में शामिल भारतीय सैनिकों के योगदान को स्वीकार कर रही है, बल्कि हर स्तर पर उनके योगदान को मान्यता देने की प्रक्रिया में भी है।
रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कहीं।
उन्होंने कहा, “आज जब पूरा देश अपने सैनिकों को याद कर रहा है, उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है, तब मैं उन सभी पूर्व सैनिकों को भी याद करना चाहता हूं जिन्होंने लगभग 40 साल पहले श्रीलंका में आईपीकेएफ (भारतीय शांति सेना) के तहत शांति स्थापना अभियान में हिस्सा लिया था।”
सिंह ने कहा, “तत्कालीन सरकार द्वारा श्रीलंका में भारतीय सेना को भेजने के फैसले पर बहस हो सकती है। मैं उसमें नहीं जाना चाहता लेकिन मेरा मानना है कि ऑपरेशन पवन में शामिल हमारे आईपीकेएफ सैनिकों द्वारा किए गए बलिदानों का सम्मान किया जाना चाहिए।”
भारत ने जुलाई 1987 से मार्च 1990 के बीच श्रीलंका में भारतीय शांति सेना की तैनाती के दौरान करीब 1,200 सैनिकों को खोया था।
भारत और श्रीलंका ने 29 जुलाई 1987 को एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद तमिल-बहुल इलाकों में वर्षों से जारी हिंसा और संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से भारत ने आईपीकेएफ को द्वीप राष्ट्र में तैनात किया था। हालांकि, शांति स्थापित नहीं हो सकी और अंततः आईपीकेएफ को वापस बुला लिया गया था।
आईपीकेएफ को श्रीलंका भेजने का फैसला राजीव गांधी सरकार के दौरान लिया गया था, जबकि वी पी सिंह सरकार के कार्यकाल में सेना को वापस बुलाया गया।
रक्षा मंत्री ने कहा, “ऑपरेशन पवन में भारतीय सेनाओं ने असाधारण साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया। कई सैनिकों ने कर्तव्य निभाते समय सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके साहस और त्याग पर कोई संदेह नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘ऑपरेशन पवन’ में शामिल शांति सैनिकों के योगदान को खुले दिल से स्वीकार कर रही है और उन्हें हर स्तर पर पूरा सम्मान दिया जा रहा है।
सिंह ने यह भी याद किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में श्रीलंका यात्रा के दौरान कोलंबो स्थित आईपीकेएफ स्मारक पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी।
उन्होंने कहा, “हम नयी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में भी आईपीकेएफ के शांति सैनिकों के योगदान को मान्यता दे रहे हैं और उन्हें पूरा सम्मान दिया जा रहा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष श्रीलंका यात्रा के दौरान भी आईपीकेएफ के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी।
भाषा
राखी संतोष
संतोष