हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ नाम पर प्रतिबंध लगाने के लिए संतों ने शुरू किया अभियान

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हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' नाम पर प्रतिबंध लगाने के लिए संतों ने शुरू किया अभियान

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  • Publish Date - June 8, 2026 / 10:29 PM IST,
    Updated On - June 8, 2026 / 10:29 PM IST

हरिद्वार, आठ जून (भाषा) ‘अखंड परशुराम अखाड़ा’ के नेतृत्व में संतों के एक समूह ने उत्तराखंड के हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ नाम से भोजन बेचने पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अभियान शुरू किया है।

यह समूह मांग कर रहा है कि दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले ‘वेज बिरयानी’ शब्द को हटाकर उसकी जगह ‘वेज पुलाव’ शब्द का इस्तेमाल करें।

अखाड़े के स्वयंसेवक पूरे शहर में पोस्टर और रेहड़ियों पर ‘वेज बिरयानी’ शब्द के ऊपर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर चिपका रहे हैं। उनका दावा है कि इस शब्द से ‘मांसाहारी होने का आभास’ होता है, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि स्थानीय नगर निकाय के नियमों के तहत हरिद्वार के कुछ क्षेत्रों में मांस, शराब और अंडे की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध है।

कौशिक ने कहा, ‘बिरयानी मूल रूप से एक मांसाहारी व्यंजन है। भले ही स्थानीय दुकानदार मांस का उपयोग नहीं करते हैं, फिर भी यह शब्द शाकाहारियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।’

उन्होंने कहा कि ‘कबाब’ और ‘चाप’ जैसे व्यंजन भी मांसाहारी व्यंजनों से जुड़े हैं, और उनके अभियान का अगला चरण इन नामों को निशाना बनाएगा।

संगठन ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर होटलों और रेस्तरां से इन शब्दों को अपने मेन्यू से हटाने का अनुरोध किया है।

कौशिक ने यह भी दावा किया कि घर-घर खाना पहुंचाने वाले ऑनलाइन ऐप प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने जिला अधिकारी से ऐसी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है।

यद्यपि पूरे शहर में मांस पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन स्वतंत्रता-पूर्व के नियमों के तहत कनखल और हर की पौड़ी सहित मुख्य क्षेत्रों में इसकी बिक्री प्रतिबंधित है।

भाषा सुमित दिलीप

दिलीप