साकेत इमारत हादसा: कैंटीन संचालक ने कहा, कपिल बहुत मददगार था

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साकेत इमारत हादसा: कैंटीन संचालक ने कहा, कपिल बहुत मददगार था

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 08:04 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 08:04 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) साकेत मेट्रो स्टेशन के पास बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत के ढहने से कुछ घंटे पहले 28 वर्षीय कपिल ने हमेशा की तरह उस छोटे से कैंटीन में खाना खाया था, जहां लोग उन्हें नाम से जानते थे और इतना भरोसा करते थे कि वह महीने के अंत में भुगतान कर देते थे। लेकिन उस शाम वह एक नौकरी के सफल साक्षात्कार की खुशी मनाने के लिए दोस्तों के साथ पास के एक अन्य भोजनालय में गए और फिर कभी लौटकर नहीं आए।

रविवार को जब बचाव अभियान समाप्त हुआ, पूरे इलाके में शोक का माहौल था। दुकानदारों और कपिल के साथ पढ़ने वाले छात्रों ने उनको एक मेहनती, मिलनसार और मददगार युवा के रूप में याद किया।

‘चाय शाय बिरयानी’ नामक कैंटीन के संचालक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कपिल उनके यहां एक जाना-पहचाना चेहरा बन गया था। सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वह आमतौर पर हर महीने की 28 तारीख को भुगतान कर देता था, लेकिन इस बार उसने मुझसे कहा था ‘अंकल, मैं आपको एक जून को पैसे दे दूंगा।’ वह नियमित रूप से हमारे कैंटीन में खाना खाता था और घटना वाले दिन भी यहां आया था।’

सिंह के अनुसार, बाद में कपिल शाम को अपने दोस्तों के साथ उस इमारत के पास स्थित एक अन्य भोजनालय में रोल खाने गया था, जहां यह हादसा हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘वह शाम को अपने दोस्तों के साथ वहां गया था। करीब 10 दिन पहले ही वह नौकरी के साक्षात्कार के लिए मुंबई गया था। वह बहुत अच्छा लड़का था और कड़ी मेहनत कर रहा था। आसपास के सभी लोग उसे पसंद करते थे और उसका स्वभाव बेहद मददगार था।’’

कपिल के दोस्तों के अनुसार, वह उन छह मित्रों में शामिल था, जो शनिवार शाम उस इमारत से सटे भोजनालय में एकत्र हुए थे। हाल में उसने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) में एक पद के लिए हुए साक्षात्कार में अच्छा प्रदर्शन किया था और उसी की खुशी में वे सभी वहां जुटे थे।

सैद-उल-अजैब के वेस्टएंड मार्ग स्थित यह इमारत शनिवार शाम करीब 7:30 बजे अचानक ढह गई, जिससे उसके बगल में मौजूद टिन-शेड वाला भोजनालय भी मलबे में दब गया। उसी समय कपिल और उसके दोस्त वहां बैठे हुए थे।

इस हादसे से छात्र और स्थानीय कारोबारी गहरे सदमे में हैं। इलाके के कोचिंग सेंटर, पुस्तकालयों और भोजनालयों में नियमित रूप से आने वाले युवा अभ्यर्थियों की अचानक मौत से लोग शोक में डूबे हुए हैं।

हादसे में आलोक की भी मौत हो गई। ‘न्यू माही लाइब्रेरी’ में लाइब्रेरी प्रबंधक अभिषेक ने आलोक को एक समर्पित और मेहनती छात्र के रूप में याद किया। आलोक पिछले वर्ष दिसंबर से वहां पढ़ाई कर रहे थे।

अभिषेक ने कहा, ‘‘वह प्रतिदिन कम से कम 10 से 12 घंटे पुस्तकालय में पढ़ाई करता था। वह वास्तव में बहुत मेहनती प्रतीत होता था और हमेशा अन्य छात्रों की मदद करने के लिए तत्पर रहता था।’’

अभिषेक ने कहा कि इमारत गिरने का समय कुछ मायनों में बड़े हादसे को टालने वाला साबित हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘अगर यह घटना रात आठ से नौ बजे के बीच हुई होती, तो कैंटीन में लोगों की संख्या कहीं अधिक होती। संभव है कि मारे गए लोगों में मैं भी शामिल होता।’’

इमारत ढहने की इस घटना का असर उन स्थानीय भोजनालयों पर भी पड़ा है, जिनका कारोबार मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर निर्भर है।

इलाके में साड्डा ढाबा संचालित करने वालीं रीना ने कहा कि कई छात्रों के हालात और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता ने लोगों के डर और चिंता को और बढ़ा दिया है।

रीना ने कहा, ‘‘हमारे कारोबार को आर्थिक नुकसान तो हुआ ही है, लेकिन इसके साथ एक डर भी बना हुआ है। हमें नहीं पता कि जो अब यहां नहीं आ रहे हैं, क्या वे अपने घर लौट गए हैं, डर की वजह से दूर चले गए हैं या फिर उनके साथ कोई अनहोनी हो गई। उनके बारे में कुछ भी निश्चित रूप से नहीं जान पाना ही सबसे ज्यादा डरावना है।’’

इमारत हादसे में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।

घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं, घनी आबादी वाले इस इलाके में इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप