साकेत इमारत हादसा : दो दिन बाद भी सदमे में छात्र, सील इमारत में फंसी अध्ययन सामग्री

साकेत इमारत हादसा : दो दिन बाद भी सदमे में छात्र, सील इमारत में फंसी अध्ययन सामग्री

साकेत इमारत हादसा : दो दिन बाद भी सदमे में छात्र, सील इमारत में फंसी अध्ययन सामग्री
Modified Date: June 1, 2026 / 08:19 pm IST
Published Date: June 1, 2026 8:19 pm IST

(अहेली दास)

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत ढहने की घटना के दो दिन बाद भी इलाके के छात्र सदमे, अनिश्चितता और अधिकारियों द्वारा सील की गई एक पास की इमारत के अंदर फंसे अपने महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के नुकसान से जूझ रहे हैं।

इस हादसे में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

ढही इमारत के ठीक बगल में ‘अराइज मेडिकल अकादमी’ में कक्षाएं ले रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि शनिवार शाम करीब सात बजे इमारत ढहने के बाद जल्दबाजी में बाहर निकलने के दौरान किताबें, नोट्स, टैबलेट, आईपैड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण वहीं छूट गए।

‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एक्जामिनेशन’ (एफएमजीई) की तैयारी कर रहे एक छात्र ने बताया, “हम घबरा गए और अपनी सारी अध्ययन सामग्री पीछे छोड़कर इमारत से बाहर भागे। अगर इमारत हिल जाती है या उसका कुछ हिस्सा गिर जाता है तो सब कुछ मलबे के नीचे दब जाएगा।”

छात्र ने कहा, “हमारी परीक्षा 28 जून को है। हम अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि हमें जल्द से जल्द अपना सामान निकालने की अनुमति दें।”

सोमवार को बचाव एवं राहत कार्य जारी रहने के बीच ये चिंताएं व्यक्त की गईं।

अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे थे कि कोई भी मलबे के नीचे न फंसा रहे।

इमारत गिरने के समय कोचिंग संस्थान के अंदर मौजूद रहे एक अन्य छात्र ने कहा कि इस घटना ने कई अभ्यर्थियों को बुरी तरह से झकझोर दिया है।

उन्होंने बताया, “ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। कुर्सियां ​​हिलने लगीं और बत्तियां बुझ गईं। छात्र ने कहा, “एक पल के लिए हमें लगा कि हम बच नहीं पाएंगे।”

अभ्यर्थी ने बताया कि घटना के समय इमारत में लगभग 150 छात्र मौजूद थे।

उन्होंने कहा, “शुक्र है, अराइज बिल्डिंग की सीढ़ियां इतनी चौड़ी थीं कि छात्र जल्दी से बाहर निकल सके। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

छात्र ने बताया कि परीक्षा से ठीक एक महीने पहले अध्ययन सामग्री न मिल पाने से अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई है।

विद्यार्थियों और निवासियों के बीच अब एक बड़ी चिंता इलाके की इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर है।

इलाके में मौजूद कई इमारतें पुरानी हैं और कुछ का रखरखाव ठीक से नहीं हुआ है।

हादसे में जान गंवाने वाले आलोक वर्मा के साथी नितेश कुमार ने कहा कि इलाके की इमारतों की हालत को लेकर बार-बार जताई गई चिंताओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने बताया, “मेरी अपनी इमारत 20 साल से अधिक पुरानी है और इसकी ठीक से देखभाल नहीं की गई है। हमने कई बार देखभाल करने वाले व्यक्ति से इस बारे में शिकायत की, लेकिन कोई कदम नहीं उठाये गये।”

नितेश ने कहा, “अधिकारियों को इलाके की हर इमारत का निरीक्षण करना चाहिए। घटना से पहले ही कार्रवाई होनी चाहिए, न कि लोगों की जान जाने के बाद।”

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप


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