नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सत्य निकेतन में बहुमंजिला हॉस्टल की इमारत ढहने की घटना कोई आम दुर्घटना नहीं थी।
इस घटना में सात लोगों की मौत हो गयी थी, जिनमें अधिकतर छात्र थे।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि जान गंवाने वाले चारों छात्र अपना करियर बनाने की उम्मीद के साथ छोटे शहरों से देश की राजधानी आए थे, लेकिन कुछ लोगों के ‘‘लापरवाह और आपराधिक आचरण’’ के कारण उनके ये सपने ‘‘चकनाचूर’’ हो गए।
अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘दुर्घटना में चार छात्रों की जान चली गई… यह बेहद दुखद है। यह कोई आम दुर्घटना नहीं है। ये चारों छात्र छोटे शहरों से बहुत उम्मीदों और सपनों के साथ राजधानी आए थे। (कुछ लोगों के) ऐसे लापरवाह और आपराधिक आचरण के कारण वह सब कुछ चकनाचूर हो गया।’’
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में इस्तेमाल होने वाली सत्य निकेतन की इमारत छह सितंबर को मरम्मत का काम चलने के दौरान ढह गई थी। इस हादसे में कई अन्य लोग घायल भी हुए थे।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि इस घटना के बाद अधिकारियों द्वारा कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें छात्रों के लिए भूमि और अन्य सुविधाओं का सक्रिय रूप से मानचित्रण करना और उन्हें चिह्नित करना शामिल है।
हालांकि, पीठ ने कहा कि हॉस्टल सुविधाओं की कमी का मुद्दा कोई ‘‘नयी बात’’ नहीं है।
पीठ ने कहा, ‘‘शहर में छात्रावास की समस्या से कौन नहीं जानता? छात्र उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ रहे हैं और यह कोई नई बात नहीं है। यह पिछले 20-25 वर्षों से इस उम्मीद में हो रहा है कि वे अपना करियर बनाएंगे। देखिए क्या हुआ है।’’
अदालत आकर्षण दानवीर राठी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मामले की स्वतंत्र जांच, सभी पीजी आवासों का निरीक्षण, साथ ही पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे और पुनर्वास योजना का अनुरोध किया गया है।
अदालत ने कहा कि इस जनहित याचिका पर 25 सितंबर को एक अन्य लंबित याचिका के साथ सुनवाई की जाएगी।
उच्च न्यायालय ने सात सितंबर को इस घटना की उच्चस्तरीय एमसीडी जांच का आदेश दिया था और यह स्पष्ट किया था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
अदालत ने कहा था कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि इसने अपर्याप्त आवास सुविधाओं (जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय या सरकार द्वारा संचालित हॉस्टल शामिल हैं), छात्रों की सुरक्षा और संरक्षा, तथा ऐसे पीजी आवासों को विनियमित करने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और अन्य अधिकारियों द्वारा उठाए गए नाकाफी उपायों को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
भाषा गोला सुरेश
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