नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज कई आपराधिक मामलों के तहत कुछ मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ दर्ज अभियोजन को वापस लेने की अनुमति दे दी है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इन मामलों में कोई गंभीर या जघन्य अपराध का आरोप नहीं है। इनमें पुतला जलाने और राजमार्गों पर धरना देने से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
उच्चतम न्यायालय का यह आदेश हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उसने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अप्रैल 2024 के आदेश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से 2023 में दायर उस आवेदन पर दिया था, जिसमें दिसंबर 2022 में गृह विभाग द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ 65 मामलों में अभियोजन वापस लेने का अनुरोध किया गया था।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 15 मामलों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
बुधवार को राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने इन मामलों में अभियोजन वापस लेने के लिए उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था।
अधिवक्ता ने कहा, ‘‘इन मामलों में कुछ भी गंभीर नहीं है। न तो सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचा था और न ही किसी को चोट आई थी।’’
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश में बदलाव किया और राज्य सरकार को इन मामलों में अभियोजन वापस लेने की अनुमति दे दी।
भाषा संतोष नरेश
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