नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ट्रेन दुर्घटनाएं रोकने के लिए ‘कवच’ प्रणाली के इस्तेमाल सहित भारतीय रेल की ओर से उठाये गए कदमों की सोमवार को सराहना की।
रेलवे के अनुसार, ‘कवच’ प्रणाली ट्रेनों की टक्कर होने से रोकने का काम करती है। जिन रेल मार्गों पर इसे लगाया गया है, उनपर ‘सिग्नल’ का उल्लंघन करने पर ट्रेन खुद ही रुक जाती है।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने उस याचिका का निस्तारण कर दिया, जिसमें यात्री सुरक्षा के मुद्दे उठाये गए थे। इससे पहले, न्यायालय ने दुर्घटनाओं को रोकने और सुरक्षित यात्रा को बढ़ावा देने के लिए रेलवे द्वारा किये गए कई उपायों पर गौर किया।
न्यायालय ने अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा, ‘‘हम रेलवे द्वारा किये गए उपायों की सराहना करते हैं।’’
याचिकाकर्ता विशाल तिवारी द्वारा दो जनवरी को दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने ‘कवच’ प्रणाली सहित सुरक्षा उपायों, यात्रियों की सुरक्षा के लिए अब तक किये गए या केंद्र के प्रस्तावित उपायों के बारे में जानना चाहा।
ओडिशा के बालासोर जिले में पिछले साल जून में हुई रेल दुर्घटना का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि ‘कवच’ प्रणाली नहीं लगाये जाने के चलते दुर्घटना हुईं। उन्होंने कहा कि अतीत में ट्रेनों के आपस में टकराने की कई घटनाएं हुई हैं।
बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस तथा एक मालगाड़ी पिछले साल जून में बालासोर के बहानागा बाजार स्टेशन के निकट आपस में टकरा गई थीं। इस दुर्घटना में 288 लोगों की मौत हुई थी।
भाषा सुभाष वैभव
वैभव