नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों के वैसे अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल आठ सितंबर तक बढ़ाने की बात कही गई है, जो जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह प्रस्ताव उस वक्त मंजूर कर लिया जब एटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने उसे अवगत कराया कि केंद्र न्यायाधिकरणों के कामकाज और उनके सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित एक नया विधेयक लाने पर विचार कर रहा है और यह विधेयक संसद के मौजूदा बजट सत्र या मानसून सत्र में लाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस विषय पर सरकार के विभिन्न स्तरों पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है, इसलिए न्यायाधिकरणों के कामकाज में किसी तरह की परेशानी या भ्रम न हो, इस कारण जो सदस्य इस बीच सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उनके कार्यकाल को इस वर्ष आठ सितंबर तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
एटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार एक प्रस्ताव पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘एक विधेयक पर विचार किया जा रहा है। इस बीच हम किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं चाहते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 के तहत नियुक्त सभी सदस्य अपने पदों पर बने रहेंगे। अगले सितंबर तक, या तो इस बजट सत्र में या मानसून सत्र में, एक नया विधेयक पारित होने की संभावना है।’’
उन्होंने यह भी बताया कि इस बीच लगभग 21 सदस्य सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
वेंकटरमणी ने कहा कि नया विधेयक पिछले वर्ष के फैसले के अनुरूप होगा और इससे विभिन्न न्यायाधिकरणों में कामकाज तथा सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।
न्यायालय ने कहा कि वह इस विषय में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए मामले की सुनवाई मई में करेगा।
भाषा सुरेश अविनाश
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