न्यायालय ने सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील सामग्री देखने पर रोक के निर्देश संबंधी याचिका खारिज की

Ads

न्यायालय ने सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील सामग्री देखने पर रोक के निर्देश संबंधी याचिका खारिज की

  •  
  • Publish Date - July 13, 2026 / 05:39 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 05:39 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील सामग्री देखने पर रोक लगाने का निर्देश केंद्र सरकार को देने संबंधी एक जनहित याचिका सोमवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह एक नीतिगत मामला है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपना अभ्यावेदन सरकार के प्राधिकारियों को दें।

पीठ ने कहा, ‘‘इसमें कोई शक नहीं कि उठाया गया मुद्दा बहुत अहम है। हालांकि, इस मामले में कानून से जुड़ा ऐसा कोई सवाल नहीं है, जिस पर इस अदालत को विचार करने की जरूरत है। यह नीतिगत मामला है, जिसके लिए तकनीक और विशेषज्ञों की राय की जरूरत है। ऐसे मामले विशेषज्ञों, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।’’

न्यायालय सामाजिक कार्यकर्ता बी.एल. जैन की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

जैन का पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता वरुण ठाकुर पेश हुए थे। याचिका में अनुरोध किया गया था कि अश्लील सामग्री देखने पर रोक लगाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना तैयार की जाए, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अभी बालिग नहीं हुए हैं। याचिका में सार्वजनिक जगहों पर किसी भी तरह की अश्लील सामग्री देखने पर रोक के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था।

जनहित याचिका में दलील दी गई, ‘‘इंटरनेट पोर्नोग्राफी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। प्रत्येक सेकंड 5,000 पोर्न साइट्स देखी जाती हैं। इंटरनेट के जरिये दो करोड़ से ज़्यादा पोर्न वीडियो/क्लिप्स जारी किए जा रहे हैं…।’’

इसमें कहा गया, ‘‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69ए के तहत, प्रतिवादियों के पास किसी भी कंप्यूटर स्रोत के जरिये किसी भी जानकारी तक जनता की पहुंच को बाधित करने के निर्देश जारी करने का अधिकार है।’’

इसमें कहा गया कि इंटरनेट की व्यापक उपलब्धता ने अश्लील सामग्री को आसानी से उपलब्ध करा दिया है, जिससे इसे अत्यधिक देखा जा रहा है और इसकी लत लग गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि इस तरह की सामग्री को देखने वालों की बढ़ती संख्या ने यौन अपराधों को बढ़ावा दिया है।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश