नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गाजियाबाद में चार वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और उसकी हत्या की वीभत्स घटना पर गहरा शोक जताते हुए शुक्रवार को इस मामले में हस्तक्षेप किया और पुलिस आयुक्त तथा जांच अधिकारी को 13 अप्रैल को मामले के रिकॉर्ड के साथ पेश होने को कहा।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मृतक बच्ची के पिता (जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन की दलीलों पर गौर किया और मामले में अब तक राज्य पुलिस द्वारा की गई जांच के तरीके पर नाराजगी जतायी।
प्रधान न्यायाधीश ने राज्य पुलिस और उन दो निजी अस्पतालों से नाखुशी जताई, जिन्होंने कथित दुष्कर्म के बाद घायल बच्ची का इलाज करने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने इसे “घोर उदासीनता” और “संवेदनहीन रवैया” बताया।
गौरतलब है कि 16 मार्च को बच्ची का एक पड़ोसी उसे कथित तौर पर चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया और जब बच्ची घर नहीं लौटी तो खोजबीन के दौरान उसके पिता ने उसे बेहोश और खून से लथपथ हालत में पाया। बाद में गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी।
भाषा गोला वैभव
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