न्यायालय ने दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत अर्जी पर जवाब के लिए पुलिस को दो सप्ताह और दिए

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न्यायालय ने दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत अर्जी पर जवाब के लिए पुलिस को दो सप्ताह और दिए

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  • Publish Date - April 6, 2026 / 01:18 PM IST,
    Updated On - April 6, 2026 / 01:18 PM IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को फरवरी 2020 के दंगों से जुड़े ‘‘बड़ी साजिश’’ के मामले में आरोपी तस्लीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी की ज़मानत याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय और दिया।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने दिल्ली पुलिस के वकील के और समय मांगने के बाद यह व्यवस्था दी।

शीर्ष अदालत ने 11 फरवरी को अहमद और सैफी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था।

उच्च न्यायालय ने पिछले साल 2 सितंबर को अहमद की ज़मानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ‘‘मुकदमे में देरी’’ ज़मानत पर विचार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती।

अदालत ने कहा था कि मौलिक अधिकारों के स्पष्ट उल्लंघन या संवैधानिक अधिकारों के हनन के मामलों को छोड़कर, केवल लंबे समय तक जेल में रहने या मुकदमे में देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि इस मामले में जिन आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, वे ‘‘उन आरोपियों की कीमत पर’’ दलीलों में देरी कर रहे हैं, जो अभी भी जेल में हैं।

अहमद के अलावा, कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम, और कई अन्य लोगों पर दिल्ली में फरवरी 2020 के दंगों का ‘‘मास्टरमाइंड’ होने के आरोप में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा