न्यायालय ने एनसीएलएटी के पूर्व सदस्य की वकालत संबंधी याचिका पर विचार करने से मना किया
न्यायालय ने एनसीएलएटी के पूर्व सदस्य की वकालत संबंधी याचिका पर विचार करने से मना किया
नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) के पूर्व तकनीकी सदस्य द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उस नियम को चुनौती दी गई थी जो अधिकरण के पूर्व सदस्यों को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण और एनसीएलएटी के समक्ष वकालत करने से रोकता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता विजय प्रताप सिंह से कहा कि यह मुद्दा ‘‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता’’ से संबंधित है और प्रार्थना को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बारे में सोचना होगा। आप अधिकरण के सदस्य रह चुके हैं। यह एक विशेष अधिकरण है। कल्पना कीजिए कि आप किसी ऐसे सदस्य के सामने पेश होते हैं जो आपके कार्यकाल के दौरान वहां कार्यरत था। इससे एक आम वादी के मन में क्या धारणा बनेगी?’’
सेवानिवृत्त न्यायिक और तकनीकी सदस्यों को एनसीएलटी और एनसीएलएटी के समक्ष वकील या सलाहकार के रूप में पेश होने, कार्य करने या पैरवी करने से प्रतिबंधित किया गया है।
सिंह ने न्यायालय को बताया कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय कुछ समय के लिए विराम अवधि होनी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर विचार करने से मना किया, इसलिए सिंह ने याचिका वापस ले ली।
भाषा शफीक माधव
माधव

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