नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केरल में कोझिकोड-वायनाड सुरंग निर्माण के लिए दी गई पर्यावरण मंज़ूरी को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह राज्य के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केरल उच्च न्यायालय के पिछले वर्ष के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘वायनाड प्रकृति संरक्षण समिति’ की याचिका को खारिज कर दिया गया था।
एनजीओ ने अपनी याचिका में कोझिकोड और वायनाड जिलों को जोड़ने संबंधी ‘ट्विन ट्यूब टनल कॉरिडोर’ के निर्माण को चुनौती दी थी।
पीठ ने एनजीओ को यह छूट दी कि यदि सुरंग निर्माण के दौरान पर्यावरण मंज़ूरी की शर्तों का कोई उल्लंघन मिले, तो वह राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से संपर्क कर सकता है। इसके बाद पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान, पीठ ने एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। इसने कहा कि यह केरल के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होगी; खासकर वहाँ की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, जहाँ अधिक जनसंख्या घनत्व और ज़मीन हासिल करने में आने वाली दिक्कतों के कारण सड़कों पर भारी भीड़भाड़ रहती है।
इस परियोजना के तहत, पश्चिमी घाट के माध्यम से कोझिकोड और वायनाड को जोड़ने वाली 8.735 किलोमीटर लंबी दोहरी सुरंग वाली सड़क का निर्माण किया जाएगा।
भाषा नेत्रपाल नरेश
नरेश