न्यायालय ने पैक खाद्य पदार्थों पर लेबल को लेकर एफएसएसएआई से मांगा स्पष्टीकरण

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न्यायालय ने पैक खाद्य पदार्थों पर लेबल को लेकर एफएसएसएआई से मांगा स्पष्टीकरण

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 03:03 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 03:03 PM IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से कहा है कि वह पैक खाद्य पदार्थों पर पैकेट के सामने की तरफ पोषण संबंधी चेतावनी वाला लेबल (एफओपीएल) लगाने की व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के अपने प्रस्ताव के तहत ‘चिंता वाले पोषक तत्वों’-जैसे वसा, चीनी और नमक के लिए प्रस्तावित चेतावनी लेबल के बारे में और अधिक स्पष्ट जानकारी दे।

फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) खाद्य पैकेजिंग पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी का एक ग्राफिक स्वरूप है, जो उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदने और स्वस्थ आहार का विकल्प चुनने के बारे में सुविचारित निर्णय लेने में मदद कर सकता है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बृहस्पतिवार को केंद्र से यह भी पूछा कि वह स्कूलों में पोषण संबंधी जागरुकता बढ़ाने की योजना कैसे बना रहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चों में अस्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित होने का गंभीर खतरा है।

शीर्ष अदालत का आदेश देर रात अपलोड किया गया।

मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। न्यायालय सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट ‘3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पैक खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य एफओपीएल लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इससे पहले एफएसएसएआई ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि उसने ऐसे खाद्य उत्पादों के लिए लाल रंग का एफओपीएल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें अतिरिक्त संतृप्त वसा, चीनी और नमक की मात्रा अधिक है।

शीर्ष अदालत में पिछले माह दाखिल अनुपालन हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा कि दो चरणों में लागू होने वाली व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में सरल, स्पष्ट और आसानी से समझ में आने वाली चेतावनी देना है, जिनमें चिंता वाले पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं।

एफएसएसएआई के हलफनामे में कहा गया है कि एफओपीएल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का उद्देश्य ‘उपभोक्ताओं की स्वीकार्यता सुनिश्चित करना’ और ‘खाद्य उद्योग को उत्पादों में आवश्यक बदलाव’ करने के लिए पर्याप्त समय देना है।

बृहस्पतिवार को पीठ ने एफएसएसएआई से दोनों चरणों को लागू करने की समयसीमा के बारे में प्रश्न किया।

भाषा शोभना नरेश

नरेश