ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक व्यापार विवाद व क्षेत्रीय संकट का हल तलाशेंगे समूह के नेता

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक व्यापार विवाद व क्षेत्रीय संकट का हल तलाशेंगे समूह के नेता

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 04:16 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 04:16 PM IST

नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) विश्व में व्यापार विवादों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल से पैदा हो रही आर्थिक चुनौतियों के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिक्स देशों के अन्य नेता भारत की मेजबानी में हो रहे शिखर सम्मेलन के लिए यहां शनिवार को जुटेंगे।

शिखर सम्मेलन के दौरान वे वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा करेंगे, जिनमें यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के असर से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को बचाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

एक रणनीतिक संतुलन बनाते हुए, भारत इस दो-दिवसीय सालाना शिखर सम्मेलन का उपयोग इस समूह को आर्थिक विकास का एक पूरक इंजन बनाने के लिए करना चाहता है। साथ ही, वह अमेरिका और अन्य पश्चिमी ताकतों के संवेदनशील रुख का भी ध्यान रख रहा है, खासकर व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्रों में।

ब्रिक्स के अध्यक्ष के तौर पर, भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ को अपने एजेंडे में सबसे अहम जगह दी है। इसका मकसद मुख्य रूप से विकासशील देशों को यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्षों से होने वाले आर्थिक असर से बचाना है, जिसके लिए भारत खाद्य सामग्री, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक समाधान तलाश रहा है।

शी और पुतिन के अलावा, नयी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले अन्य नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूटीओ) के महानिदेशक नगोजी ओकोन्जो-इवेला, डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस, न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ और ‘एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक’ के प्रमुख जो जियायी भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई विदेश मंत्री मौरो विएरा करेंगे, जबकि थाईलैंड के दल का नेतृत्व उप-प्रधानमंत्री सिहासाक पुआंगकेटकेव करेंगे। युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका रोज एपेल अलुपो और उज़्बेकिस्तान के उपप्रधानमंत्री जमशीद कुचकारोव शिखर सम्मेलन में अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

फिलीपीन के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरेस्ट न्दायिशिमिये और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव भी क्रमशः आसियान, अफ्रीकी संघ और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन जैसे क्षेत्रीय समूहों का प्रतिनिधित्व करने के लिए शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

यह शिखर सम्मेलन काफी मायने रखता है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार और शुल्क (टैरिफ) नीतियों के दुष्प्रभावों का सामना कर रही है।

शिखर सम्मेलन से इतर, शुक्रवार को एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स को आर्थिक चुनौतियों से निपटने की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें पारदर्शी व्यापार और निवेश के तौर-तरीके सुनिश्चित करना भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका मुख्य मकसद हमारे देशों के कारोबार के लिए अधिक साझेदार ढूंढना, अधिक बाजार तक पहुंचना, आपूर्ति नेटवर्क से जुड़ना और एक-दूसरे की खूबियों का फायदा उठाकर व्यवहार्य वाणिज्यिक साझेदारी आसान बनाया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसका मकसद आपसे में जुड़े हुए और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए संकट से उबरने की हमारी क्षमता को मजबूत करना है।’’

सम्मेलन शुरू होने में बस एक दिन बचा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि सदस्य देश किसी साझा बयान पर आम सहमति बना पाएंगे या नहीं, क्योंकि आम सहमति पर आधारित इस समूह में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच पश्चिम एशिया संकट को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

ईरान स्पष्ट रूप से अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई की निंदा करने पर जोर दे रहा है, जबकि यूएई का कहना है कि बयान में अहम समुद्री मार्गों के जरिये मुक्त आवाजाही बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जाना चाहिए।

ब्रिक्स में शुरू में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ।

बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश