न्यायालय ने मणिपुर की सामूहिक बलात्कार पीड़िताओं के लिए वकील की नियुक्ति के संबंध में जवाब मांगा

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न्यायालय ने मणिपुर की सामूहिक बलात्कार पीड़िताओं के लिए वकील की नियुक्ति के संबंध में जवाब मांगा

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 09:51 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मणिपुर राज्य विधिक प्राधिकरण से उन दो महिलाओं के लिए वकील की नियुक्ति के संबंध में जवाब मांगा, जिन्हें कथित तौर पर राज्य में 2023 के जातीय संघर्षों के दौरान निर्वस्त्र अवस्था में घुमाया गया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा दो आरोपियों अरुण खुंडोंगबम और नामिरकपम किरण मेइती को जमानत दिए जाने के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई करते हुए मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को नोटिस जारी किया। इन दोनों पर पीड़िताओं के साथ सामूहिक बलात्कार करने और उन्हें निर्वस्त्र अवस्था में घुमाने का आरोप है।

आठ सितंबर, 2025 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने दोनों आरोपियों को इस आधार पर जमानत दे दी थी कि उनपर आरोप तय होने से पहले ही वे दो साल से हिरासत में थे और इसे ‘‘अनुचित लंबी कैद’’ करार दिया।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, ‘‘लगाए गए आरोप गंभीर और चौंकाने वाले हैं, लेकिन यह अदालत इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि बिना मुकदमे के अनिश्चितकालीन हिरासत मुकदमे से पहले की सजा के बराबर है, जो कानूनन अस्वीकार्य है।’’

सुनवाई के दौरान, सीबीआई के वकील ने यौन हिंसा के गंभीर आरोपों के कारण जमानत रद्द करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘आरोपियों ने महिलाओं को निर्वस्त्र अवस्था में घुमाया। यह एक घिनौना मामला है। महिलाओं से सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उन्हें घुमाया गया।’’

पीड़िताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता निजाम पाशा ने कहा, ‘‘छब्बीस फरवरी को इस अदालत ने कहा था कि पीड़िताओं को कानूनी मदद के लिए वकील नियुक्त किए जाएंगे, लेकिन अभी तक उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।’’

उन्होंने अनुरोध किया कि कानूनी सहायता के लिए वकील मणिपुर में बोली जाने वाली भाषाओं में दक्ष होने चाहिए, क्योंकि पीड़िताएं केवल अपनी मातृभाषा में ही बातचीत करने में सक्षम हैं।

शीर्ष अदालत ने मामले में दर्ज 11 प्राथमिकी की जांच कर रही सीबीआई से 13 फरवरी को दो सप्ताह के भीतर वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

हमले का एक वीडियो ऑनलाइन सामने आने और महीनों बाद व्यापक रूप से साझा किए जाने के बाद देशव्यापी आक्रोश फैलने पर 20 जुलाई 2023 को उच्चतम न्यायालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया।

मणिपुर में तीन मई, 2025 को पर्वतीय जिलों में आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद जातीय हिंसा भड़क उठी। यह विरोध प्रदर्शन मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के खिलाफ था। हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान चली गई।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश