न्यायालय ने सीबीआई, ईडी मामलों में आरोपी व्यक्ति के खिलाफ जारी एलओसी पर रोक लगाई

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न्यायालय ने सीबीआई, ईडी मामलों में आरोपी व्यक्ति के खिलाफ जारी एलओसी पर रोक लगाई

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  • Publish Date - April 28, 2026 / 06:45 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 06:45 PM IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उस व्यक्ति के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) पर मंगलवार को रोक लगा दी, जिसपर जांच एजेंसी (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज अलग-अलग मामलों में मुकदमा चल रहा है।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता निमेष नवीनचंद्र शाह की एक याचिका पर गृह मंत्रालय को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया। शाह ने अपनी याचिका में सीबीआई द्वारा जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) को चुनौती दी है।

याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को अवगत कराया कि यह सर्कुलर 2022 में जारी किया गया था, लेकिन उन्हें लगभग तीन वर्षों तक इसकी जानकारी नहीं दी गई।

सीबीआई ने नौ नवंबर 2022 को जारी एलओसी पीठ के समक्ष पेश किया, जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लिया।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमारी राय है कि नौ नवंबर 2022 को जारी लुकआउट सर्कुलर को फिलहाल निलंबित रखा जाए।’’

पीठ ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे के निर्णय के लिए गृह मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार बनाना आवश्यक है।

इसके बाद गृह मंत्रालय को मामले में पक्षकार के रूप में शामिल किया गया और उसे नोटिस जारी किया गया।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले सीबीआई, केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार से शाह की उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें उन्होंने इस वर्ष फरवरी में दिए गए मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय ने सीबीआई की ओर से जारी एलओसी के खिलाफ शाह की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने इस सुर्कलर को रद्द करने की मांग की थी।

शाह के वकील ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर 2022 में जारी किया गया था, लेकिन मई 2025 तक उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के वकील ने लुकआउट सर्कुलर जारी करने से संबंधित एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला दिया।

पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ‘‘आपको गृह मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार बनाना होगा।’’

याचिकाकर्ता के वकील ने 21 अप्रैल को शीर्ष अदालत को बताया था कि यह ‘लुकआउट सर्कुलर’ उन्हें कभी औपचारिक रूप से नहीं दिया गया था।

भाषा सुरेश दिलीप

दिलीप