चमोली के पीपलकोटी सुरंग हादसे में दो लापता श्रमिकों की तलाश जारी
चमोली के पीपलकोटी सुरंग हादसे में दो लापता श्रमिकों की तलाश जारी
गोपेश्वर, 18 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में चमोली जिले के पीपलकोटी में पिछले सप्ताह हुए सुरंग हादसे में दो लापता श्रमिकों की तलाश के लिए बचाव एवं राहत अभियान मंगलवार को भी जारी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) से मिली जानकारी के अनुसार, एसडीआरएफ, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), पुलिस और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीम 13 अगस्त को हुए सुरंग हादसे के बाद से दो लापता श्रमिकों की तलाश में लगातार राहत एवं बचाव कार्य चला रही है।
एसडीआरएफ ने बताया कि सुरंग के भीतर काफी दलदल होने के बावजूद तलाश अभियान जारी है और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच सभी टीम आपसी समन्वय से अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
उसने बताया कि सुरंग से पानी को लगातार बाहर निकाला जा रहा है और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों के माध्यम से सभी संभावित स्थानों पर गहनता से खोजबीन की जा रही है।
चमोली के जिला सूचना अधिकारी धीरज कार्की ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि हादसे के दौरान सुरंग के भीतर फंसी पांच जेसीबी मशीनों में से अब तक तीन को बाहर निकाला गया है जिससे लापता श्रमिकों की खोजबीन के कार्य में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि हादसे के दौरान मलबे में फंसी बाकी दो मशीनें भी जल्द बाहर निकाल ली जाएंगी।
टीएचडीसी इंडिया की मायापुर-पीपलकोटी सुरंग में भूस्खलन के बाद मलबा और पानी भर गया था जिसमें आठ लोगों की मौत हो गयी जबकि दो अन्य अब भी लापता हैं। हादसे में 12 अन्य श्रमिक भी घायल हुए जिन्हें सुरंग से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अधिकारियों के अनुसार, लापता श्रमिकों में झारखंड के रहने वाले लुकास टोपनो और छत्तीसगढ़ के चेतन पोयाम शामिल हैं।
इस बीच, चमोली जिले में ही तपोवन-ज्योतिर्मठ क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) की 520 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग में भूधंसाव से एक छोटा गड्ढा (कैविटी) बन गया और उससे पानी का रिसाव होने लगा जिसके बाद एहतियातन सभी श्रमिकों को तत्काल बाहर निकालकर खुदाई का काम रोक दिया गया।
एनटीपीसी के अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी विशेषज्ञ गड्ढे को भरने का काम कर रहे हैं। कार्य के पूरा होने के बाद ही सुरंग निर्माण का काम दोबारा शुरू किया जाएगा।
भाषा सं दीप्ति सुरभि
सुरभि

Facebook


