नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के बिजनौर से ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ के तहत नदी और मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फिन की गणना के लिए दूसरा व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि सर्वेक्षण की शुरुआत तीन नौकाओं में सवार 26 अनुसंधानकर्ताओं के साथ हुई, जिन्होंने पारिस्थितिकीय और पर्यावास मापदंडों को रिकॉर्ड किया तथा पानी के नीचे ध्वनिक निगरानी के लिए हाइड्रोफोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया।
पहले चरण में, सर्वेक्षण में बिजनौर से गंगा सागर तक गंगा की मुख्य धारा और सिंधु नदी को शामिल किया जाएगा।
दूसरे चरण में, इसमें ब्रह्मपुत्र नदी, गंगा की सहायक नदियां, सुंदरवन और ओडिशा शामिल होंगे।
बयान के अनुसार, गंगा नदी डॉल्फिन के अलावा, सर्वेक्षण में सिंधु नदी डॉल्फिन और इरावदी डॉल्फिन की स्थिति का आकलन किया जाएगा, साथ ही उनके आवास की स्थिति, खतरों और उनसे संबंधित संरक्षण-प्राथमिकता वाले जीवों का भी आकलन किया जाएगा। यह पहल भारत के नदी पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए साक्ष्य-आधारित संरक्षण योजना और नीतिगत कार्रवाई का समर्थन करने हेतु ठोस वैज्ञानिक डेटा उत्पन्न करेगी।
पिछले राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (2021-23) में भारत में नदी डॉल्फ़िन की संख्या अनुमानित तौर पर 6,327 दर्ज की गई थी, जिनमें गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र प्रणालियों में पाई जाने वाली गंगा नदी डॉल्फ़िन और ब्यास नदी में पाई जाने वाली सिंधु नदी डॉल्फ़िन की एक छोटी आबादी शामिल है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का स्थान रहा, जो डॉल्फिन के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए गंगा बेसिन के महत्वपूर्ण महत्व को उजागर करता है।
बयान के अनुसार, वर्तमान सर्वेक्षण में पिछली बार की तरह ही मानकीकृत पद्धति का पालन किया जा रहा है लेकिन इसमें नए क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जिसमें सुंदरवन और ओडिशा में पाई जाने वाली एक नयी प्रजाति, इरावदी डॉल्फिन का अनुमान लगाना भी शामिल है। यह विस्तारित भौगोलिक कवरेज इस प्रजाति के गणना संबंधी अनुमानों को अद्यतन करने, खतरों और आवास की स्थितियों का आकलन करने और प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत बेहतर संरक्षण योजना बनाने में सहायक होगी।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पिछले वन्यजीव सप्ताह के दौरान देहरादून में डॉल्फ़िन की अखिल भारतीय गणना और इसके गणना प्रोटोकॉल के दूसरे चरण की शुरुआत की थी।
इस कार्यक्रम का समन्वय भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून द्वारा राज्य वन विभागों और सहयोगी संरक्षण संगठनों डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, आरण्यक और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।
भाषा
नेत्रपाल पवनेश
पवनेश