वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम होंगे सीबीएसई के नए प्रमुख

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वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम होंगे सीबीएसई के नए प्रमुख

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 10:08 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 10:08 PM IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच मंगलवार को वरिष्ठ नौकरशाह लोखंडे प्रशांत सीताराम और वरुण भारद्वाज को क्रमशः बोर्ड का नया चेयरमैन और सचिव नियुक्त किया गया जबकि मौजूदा अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2001 बैच के एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम एवं केंद्रशासित प्रदेश) कैडर के अधिकारी सीताराम फिलहाल गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने सीबीएसई के नए चेयरमैन की नियुक्त को मंजूरी दी है। सीताराम राहुल सिंह का स्थान लेंगे।

कार्मिक मंत्रालय के आदेश के अनुसार राहुल सिंह को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है।

एसीसी ने सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके मूल कैडर गृह मंत्रालय में “प्रशासनिक आधार” पर समयपूर्व वापस भेजने को मंजूरी दे दी है।

आदेश के अनुसार उन्हें विस्तारित “कूलिंग-ऑफ” अवधि का पालन करना होगा और वह 12 दिसंबर 2030 के बाद ही दोबारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के पात्र होंगे।

साल 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) अधिकारी वरुण भारद्वाज को हिमांशु गुप्ता के स्थान पर सीबीएसई का नया सचिव बनाया गया है। वह फिलहाल शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब 12वीं कक्षा की परीक्षा प्रक्रिया में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है।

सीबीएसई उस समय विवादों में घिर गई जब 12वीं कक्षा के कुछ विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुईं प्रतियों की लिखावट उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं। इससे ओएसएम प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं के संभावित अदला-बदली को लेकर सवाल उठे।

छात्रों और अभिभावकों ने सीबीएसई परीक्षा प्रक्रिया में ओएसएम प्रणाली के क्रियान्वयन पर भी चिंता जताई है। बोर्ड को तकनीकी खामियों, भुगतान विफलताओं तथा सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। इसके चलते प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है।

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश