म्यामां से भारत में घुसने पर सात ‘वांछित व्यक्तियों’ को गिरफ्तार किया गया: अधिकारी
म्यामां से भारत में घुसने पर सात ‘वांछित व्यक्तियों’ को गिरफ्तार किया गया: अधिकारी
नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) मिजोरम की खुली सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल होने के बाद ‘कुछ वांछित व्यक्तियों की’ भागने की कोशिश करने की गुप्त सूचना मिलने पर सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया जिसके फलस्वरूप एक अमेरिकी सुरक्षा विश्लेषक समेत सात विदेशियों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी से भारत की पूर्वोत्तर सीमा पर ‘गंभीर सुरक्षा कमजोरियां’ उजागर हुई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक म्यामां से मिजोरम सीमा के रास्ते भारत में घुसे थे, लेकिन बाद में उन्हें देश के विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों पर पकड़ लिया गया।
पिछले सप्ताह गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने इन व्यक्तियों को उस समय हिरासत में लिया जब वे भारत के प्रमुख पारगमन केंद्रों से गुजरने का प्रयास कर रहे थे।
अमेरिकी नागरिक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (एसओएलआई)’ के संस्थापक हैं। उनका दावा है कि वह ‘लीबियाई क्रांति’ का हिस्सा रहे हैं।
छह यूक्रेनी नागरिकों—हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर को दिल्ली और लखनऊ हवाई अड्डों पर हिरासत में लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने सभी सात विदेशियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। संदेह है कि वे ‘पीपुल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ)’ को प्रशिक्षण दे रहे थे, जो म्यांमा के सैन्य जुंटा द्वारा आतंकवादी घोषित एक लोकतंत्र समर्थक समूह है।
इन गिरफ्तारियों से राजनयिक तनाव पैदा हो गया है और यूक्रेन ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई की मांग की और दावा किया कि गैरकानूनी गतिविधि को साबित करने वाले ‘कोई पुख्ता सबूत’ नहीं हैं। उन्होंने भारतीय अधिकारियों द्वारा आधिकारिक सूचना न दिए जाने की भी आलोचना की।
अमेरिकी दूतावास ने भी वैनडाइक की गिरफ्तारी को स्वीकार किया, लेकिन उनकी निजता का हवाला देते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आरोपी म्यांमा में जातीय सशस्त्र समूहों (ईएजी) को प्रशिक्षण देने के वास्ते रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।
उन्होंने बताया कि ये ईएजी भारतीय विद्रोही संगठनों को हथियार, गोला-बारूद और ‘युद्ध प्रशिक्षण’ देकर उनका समर्थन भी कर रहे हैं।
यह भी संदेह है कि आरोपियों ने अपने सहयोगियों के माध्यम से यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमा में ड्रोन की बड़ी खेप अवैध रूप से पहुंचायी।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पड़ोसी देश में स्थित ईएजी को कथित रूप से ड्रोन पहुंचाये जाने की जांच कर रही हैं।
गिरफ्तार व्यक्तियों को 14 मार्च को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान सभी संवैधानिक और वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किया गया तथा उनकी गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना उन्हें अंग्रेजी के साथ-साथ उनकी मातृभाषा में भी दी गई और इसकी पावती भी प्राप्त हुई।
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने पिछले साल मार्च में कहा था कि जून से दिसंबर 2024 तक लगभग 2,000 विदेशी मिजोरम आए थे और उनमें से कई पर्यटक बनकर नहीं आए थे और बिना किसी को पता चले राज्य से चले गए थे।
उन्होंने कहा कि म्यांमा जाने वाले विदेशी मिजोरम का गुप्त रूप से पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग कर रहे हैं, जो केंद्र सरकार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश

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