नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) कई सांसदों ने बुधवार को सरकार के उस विधेयक पर सवाल उठाए, जिसमें भारतीय सांख्यिकीय संस्थान का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। उनका कहना है कि इससे इस प्रमुख संस्थान की स्वायत्तता कम हो जाएगी।
भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सदस्यों ने भारतीय सांख्यिकीय संस्थान विधेयक, 2026 को लेकर चिंता जताई और इस पर गहन विचार विमर्श करने की मांग की।
इस विधेयक पर चर्चा के लिए समिति की पहली बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में शामिल कई लोगों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए क्योंकि उन्हें लगता है कि प्रस्तावित कानून से भारतीय सांख्यिकीय संस्थान की स्वायत्तता कम हो सकती है।
यह विधेयक संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। इसे पेश किए जाने के समय कई सांसदों ने इस पर आपत्ति जताई थी।
इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक को संसदीय समिति के पास गहन विचार विमर्श के लिए भेज दिया।
समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। हालांकि, बुधवार को सूत्रों ने बताया कि विधेयक पर तय समय से कहीं अधिक वक्त लगेगा।
विधेयक का उद्देश्य संस्थान को कॉरपोरेट निकाय जैसा बनाना है, ताकि इसके कामकाज को बेहतर बनाया जा सके, पढ़ाई-लिखाई और शोध में बेहतरीन काम को बढ़ावा दिया जा सके, तथा इसे सांख्यिकीय और उससे जुड़े क्षेत्रों में उभरती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।
विधेयक के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति संस्थान के ‘विजिटर’ होंगे और ‘निदेशक मंडल’ संस्थान की मुख्य नीति-निर्धारक और कार्यकारी संस्था होगी।
बोर्ड की अध्यक्षता एक चेयरपर्सन करेंगे, जो अकादमिक जगत, उद्योग, शिक्षा, लोक नीति और सांख्यिकी विज्ञान के क्षेत्र से कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।
विधेयक में कहा गया है कि बोर्ड केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह होगा।
भाषा सुभाष नरेश
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