प्रस्तावित बिदादी परियोजना से जुड़े तथ्य जनता के सामने लाएंगे : शिवकुमार
प्रस्तावित बिदादी परियोजना से जुड़े तथ्य जनता के सामने लाएंगे : शिवकुमार
बेंगलुरु, नौ अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार बिदादी के नजदीक प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (जीबीआईटी) परियोजना से जुड़े तथ्यों को सामने लाएगी और कोई भी सच्चाई को छिपा नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है और 13 अगस्त से विधानमंडल के शुरू हो रहे मॉनसून सत्र के दौरान सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
जनता दल (सेक्युलर) ने जीबीआईटी परियोजना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ अपनी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर तीन दिवसीय ‘पदयात्रा’ निकाल रही है। मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी इस यात्रा पर की। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने और पदयात्रा निकालने का अधिकार है। वे जो करना चाहते हैं, करें। हमें कोई आपत्ति नहीं है। सच्चाई को कोई छिपा नहीं सकता। हम भी सच्चाई को सामने लाने का काम करेंगे।’’
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्हें विधानसभा में आकर इस पर चर्चा करने दें… हम विधानसभा में उन्हें जवाब देंगे। वे जहां चाहें, वहां शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कानून सही समय पर उचित कार्रवाई करेगा।’’
मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि जीबीआईटी परियोजना न तो उनकी परियोजना थी और न ही मौजूदा कांग्रेस सरकार की कोई पहल, बल्कि यह 2006 में एच. डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली भाजपा-जद (एस) गठबंधन सरकार द्वारा घोषित प्रस्ताव की ही आगे की प्रक्रिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिदादी के पास बायरामंगला से बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क तक की इस पदयात्रा का नेतृत्व जद(एस) की युवा शाखा के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी कर रहे हैं और इसमें दोनों दलों के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हो रहे हैं, जिसमें लगभग 38 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी।
जद(एस) नेता और केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और अन्य नेताओं के साथ बायरामंगला में इस पदयात्रा को रवाना किया।
किसानों और स्थानीय निवासियों के विरोध के बीच राज्य सरकार ने जीबीआईटी परियोजना के लिए सात गांवों में 5,400 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण को लेकर अंतिम अधिसूचना के दो चरण जारी किए हैं।
सूत्रों के अनुसार, बिदादी परियोजना के लिए 25 गांवों में फैली 9,600 एकड़ भूमि की जरूरत है।
किसान इस परियोजना के विरोध में स्थानीय स्तर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
भाषा
शुभम धीरज
धीरज

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