छह पूर्व प्रधान न्यायाधीशों के अनुसार एक साथ चुनाव कराने से संघवाद कमजोर नहीं होगा :जेपीसी प्रमुख
छह पूर्व प्रधान न्यायाधीशों के अनुसार एक साथ चुनाव कराने से संघवाद कमजोर नहीं होगा :जेपीसी प्रमुख
पणजी, 11 जुलाई (भाषा) भारत के छह पूर्व प्रधान न्यायाधीशों समेत कानूनी विशेषज्ञों ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को बताया कि प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (ओएनओई) ढांचा संविधान के अनुरूप है और यह संघीय ढांचे या लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करता है। समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
गोवा के जेपीसी के दो दिवसीय दौरे के समापन पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि समिति ने इस बात को लेकर उठाई गई चिंताओं की जांच-पड़ताल की कि क्या लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से संघवाद कमजोर होगा या संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सामने पहला सवाल यह था कि क्या एक साथ चुनाव कराना संविधान के खिलाफ है, संघवाद के खिलाफ है या लोकतंत्र के खिलाफ है। हमने भारत के छह पूर्व प्रधान न्यायाधीशों समेत कानूनी विशेषज्ञों की राय मांगी। उन सभी ने स्वतंत्र रूप से समिति को बताया कि एक साथ चुनाव कराने से संघीय ढांचे, लोकतंत्र या संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं होता है।’’
चौधरी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों, विधि आयोग के अध्यक्ष और कई संवैधानिक विशेषज्ञों ने भी समिति के समक्ष इसी तरह के विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा, ‘‘संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच यह सहमति है कि एक साथ चुनाव कराना पूरी तरह से संविधान के अनुरूप है और यह संविधान के किसी भी प्रावधान के विपरीत नहीं है।’’
भाजपा नेता ने कहा कि समिति ने एक साथ चुनाव कराने के वित्तीय प्रभावों का आकलन करने के लिए अर्थशास्त्रियों से भी परामर्श किया।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने से चुनाव संबंधी व्यवधानों को कम करके और शासन व्यवस्था में सुधार लाकर देश की अर्थव्यवस्था में लगभग सात लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है।
चौधरी ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव शिक्षा, पर्यटन और औद्योगिक उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बार-बार चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है, जिससे शिक्षा प्रभावित होती है। गोवा जैसे पर्यटन स्थलों को नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि चुनाव और आदर्श आचार संहिता के कारण पर्यटन गतिविधियां बाधित होती हैं। चुनाव की अवधि के दौरान लगभग पांच करोड़ प्रवासी श्रमिकों का आवागमन होता है, जिससे औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होता है।’’
चौधरी ने कहा कि चुनाव से संबंधित व्यवधानों के कारण उद्योगों को भी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उत्पादन, ऋण की अदायगी और बैंकिंग क्षेत्र प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से सरकारों को लगातार पांच साल तक बिना किसी रुकावट के शासन चलाने का मौका मिलेगा।
एक साथ चुनावों के इतिहास का उल्लेख करते हुए चौधरी ने कहा कि 1952 से 1967 के बीच लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हर साल पांच से छह विधानसभा चुनाव होते हैं, जिससे देश लगभग पूरे वर्ष चुनावी मोड में बना रहता है।’’
चौधरी ने कहा कि संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग, निर्वाचन आयोग ने अपनी 1983 की रिपोर्ट में, विधि आयोग और कई विशेषज्ञ समितियों ने राष्ट्रीय हित में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी।
उन्होंने कहा कि जेपीसी ने महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, गुजरात और गोवा समेत कई राज्यों का दौरा किया ताकि मुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों, विधायकों, लोक सेवकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नागरिक समाज संगठनों और मीडिया से सुझाव प्राप्त किए जा सकें।
उन्होंने कहा, ‘‘समिति को देशभर के हितधारकों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों पर हमारी रिपोर्ट तैयार करते समय विचार किया जायेगा। हमारा उद्देश्य ऐसा कानून बनाना है जो आने वाले दशकों तक राष्ट्रीय हित में हो।’’
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव

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