एसआईआर: मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ अर्जियों पर 19 अपीलीय न्यायाधिकरण करेंगे निर्णय

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एसआईआर: मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने के खिलाफ अर्जियों पर 19 अपीलीय न्यायाधिकरण करेंगे निर्णय

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 08:31 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 08:31 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अध्यक्षता में गठित उन्नीस अपीलीय न्यायाधिकरण पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की याचिकाओं पर फैसला करेंगे।

अदालत ने कहा कि न्यायाधिकरण निर्वाचन आयोग (ईसी) के उन अधिकारियों की याचिकाओं पर भी फैसला सुनाएंगे, जो हो सकता है कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 700 न्यायिक अधिकारियों सहित निर्णय लेने वाले अधिकारियों द्वारा मतदाता सूची में व्यक्तियों को शामिल किए जाने से असंतुष्ट हों।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त दो पत्रों पर गौर किया, जिनमें इस प्रक्रिया की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश ने जारी एसआईआर प्रक्रिया में आपत्तियों के निपटारे की ‘असाधारण कवायद’ को उल्लेखित करते हुए कहा कि 31 मार्च तक कुल 60 लाख आपत्तियों में से लगभग 47.4 लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है।

पीठ ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त पत्रों के अनुसार, ’31 मार्च, 2026 को शाम 4:04 बजे तक, राज्य भर में कुल 60,06,675 आपत्तियों में से 46,60,135 आपत्तियों पर निर्णय लिया जा चुका है। हमें सूचित किया गया है कि आज तक निपटारे की संख्या 47,30,000 से अधिक हो गई है।’

पीठ ने कहा कि 20 मार्च को निर्वाचन आयोग ने 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के गठन को अधिसूचित किया था, जो अगले आठ सप्ताह तक कोलकाता के डायमंड हार्बर रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान से कार्य करेंगे। यह संस्थान जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा संचालित है।

पीठ ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि आवश्यकता पड़ने पर भारत निर्वाचन आयोग जल शक्ति मंत्रालय से समय विस्तार मांगेगा और/या संबंधित पक्षों से परामर्श करके वैकल्पिक परिसर की पहचान करेगा।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, हम यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी स्थिति में, अपीलीय न्यायाधिकरण कोलकाता में ही कार्य करेंगे।’’

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने भी इस मुद्दे को उठाया है कि न्याय निर्णायक प्राधिकरण द्वारा आपत्तियों को खारिज करने के लिए ‘‘कारण’’ उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

निर्वाचन आयोग ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि मतदाता सूची से नाम हटाने या शामिल करने के विरुद्ध अपीलों पर निर्णय लेते समय न्यायाधिकरणों को न्यायिक अधिकारियों के समक्ष पक्षों के रिकॉर्ड तक पहुंच प्राप्त होगी।

पीठ ने कहा, ‘‘किसी भी संदेह को दूर करने के लिए, हम अपीलीय न्यायाधिकरणों से अनुरोध करते हैं कि वे अपने समक्ष दायर अपीलों पर निर्णय लेने से पहले, न्यायिक अधिकारियों द्वारा आपत्तियों पर निर्णय लेते समय दिए गए कारणों सहित संपूर्ण अभिलेखों की पुन: समीक्षा करें और साथ ही इन कारणों की जानकारी पक्षों को भी दें।’’

उसने कहा कि न्यायाधिकरण नैसर्गिक न्याय के मूल सिद्धांत के अनुरूप अपनी प्रक्रियाएं विकसित करने और पक्षों को उचित अवसर प्रदान करने के बाद अपीलों पर निर्णय देने के लिए स्वतंत्र होंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘यह भी उल्लेख किया जा सकता है कि मुख्य न्यायाधीश ने हमें सूचित किया है कि लंबित आपत्तियों पर 7 अप्रैल, 2026 तक निर्णय होने की संभावना है।’

पीठ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका सहित संबंधित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तारीख निर्धारित की।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘हम तथ्यों और आंकड़ों से बेहद संतुष्ट और आशावादी हैं।’

अदालत ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को न्यायिक अधिकारियों, न्यायाधिकरण के सदस्यों और कर्मचारियों को मानदेय और अन्य खर्चों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं, जिनमें मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता भी शामिल थे, ने नाम हटाए जाने की दर बहुत अधिक होने पर चिंता जताई। उन्होंने इसके ‘‘करीब 45 प्रतिशत’’ होने का दावा किया। उन्होंने नए आवेदन दाखिल किए जाने और कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं के मुद्दे भी उठाए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि विरोधी पक्ष दावा करेंगे कि मतदाताओं को 100 प्रतिशत शामिल या बाहर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘हमें न्यायाधिकरणों को अपना कार्य करने और मतदाता सूची में नाम हटाने या शामिल किए जाने के मामलों से निपटने देना चाहिए।’

हालांकि, पीठ ने कुछ आशंकाओं को ‘अति तकनीकी’ करार दिया और पक्षों को अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष विशिष्ट शिकायतें उठाने की सलाह दी।

प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘आख़िरकार, आपके पास राहत/उपाय की कमी नहीं है।’

उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

दस मार्च को, इसने दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए एक ढांचा निर्धारित किया था और स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरणों की स्थापना का निर्देश दिया था।

चौबीस मार्च को, पीठ ने याचिकाकर्ताओं को प्रशासनिक मामलों के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने को कहा, यह देखते हुए कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अधिकांश राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है।

भाषा अमित नरेश

नरेश