एसआईआर का इस्तेमाल वंचित भारतीयों का एक स्थाई वर्ग बनाने के लिए किया जाएगा : ओवैसी
एसआईआर का इस्तेमाल वंचित भारतीयों का एक स्थाई वर्ग बनाने के लिए किया जाएगा : ओवैसी
हैदराबाद, तीन जून (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का इस्तेमाल वंचित भारतीयों का एक स्थाई वर्ग बनाने के लिए किया जाएगा।
ओवैसी ने कहा कि मतदान का अधिकार ही ताकतवर लोगों के खिलाफ गरीबों का एकमात्र हथियार है।
लोकसभा में हैदराबाद का प्रतिनिधित्व करने वाले ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पहले मतदाता सूची का दस्तावेज आधारित एसआईआर किया, जिसके तहत 13 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 6.5 करोड़ नाम हटा दिए गए।
उन्होंने कहा कि अब सरकार चाहती है कि एक समिति मतदाता सूचियों से हटाए गए लोगों का अध्ययन करे और अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत एवं निर्वासन के लिए एक स्थायी प्रणाली बनाए।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से हटाए गए लोगों में अधिकतर मुस्लिम, महिलाएं, गरीब और प्रवासी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “एसआईआर का इस्तेमाल वंचित भारतीयों का एक स्थाई वर्ग बनाने के लिए किया जाएगा। मतदान का अधिकार ही शक्तिशाली लोगों के खिलाफ गरीबों का एकमात्र हथियार है। इसके बिना सरकार उनके साथ मनमानी करेगी।”
ओवैसी ने कहा, “हमें पहले से ही ऐसी खबरें मिल रही हैं कि लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। कानून के तहत एसआईआर के माध्यम से नाम हटाए जाने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति नागरिक नहीं है।”
उन्होंने कहा कि 27 लाख लोगों के मामले अब भी विचाराधीन हैं और कई लोग फॉर्म-6 के जरिये मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए नये सिरे से आवेदन कर सकते हैं।
ओवैसी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने खुद उन लोगों के बारे में कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है, जिन्हें विदेशी होने के कारण मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के अध्ययन के लिए समिति की जरूरत क्यों है।
ओवैसी ने कहा कि सरकार के अपने आंकड़े बताते हैं कि 2.0 टीएफआर (कुल प्रजनन दर) के साथ मुस्लिम जनसांख्यिकी और जनसंख्या स्थिर हो गई है।
उन्होंने कहा, “तो फिर हमें इस समिति की जरूरत क्यों है? ताकि मुसलमानों के खिलाफ लगातार संदेह और डर का माहौल बना रहे।”
ओवैसी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार केवाईसी या एसआईआर के नाम पर दस्तावेजीकरण में भारतीयों का समय बर्बाद करना पसंद करती है, जबकि वह एक साधारण परीक्षा भी ठीक से आयोजित नहीं कर सकती।
भाषा पारुल रंजन
रंजन

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