कानून में संशोधन के छह साल बाद भी केंद्र ने भारतीय मध्यस्थता परिषद का गठन नहीं किया
कानून में संशोधन के छह साल बाद भी केंद्र ने भारतीय मध्यस्थता परिषद का गठन नहीं किया
नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन के छह साल बाद भी देश में संस्थागत मध्यस्थता को विनियमित करने और बढ़ावा देने के लिए भारतीय मध्यस्थता परिषद का गठन नहीं किया है।
केंद्रीय कानून मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कॉरपोरेट और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को वाणिज्यिक विवादों के निपटारे के लिए तदर्थ मध्यस्थता को छोड़कर संस्थागत मध्यस्थता को अपनाने में वर्षों लग गए।
प्रस्तावित मध्यस्थता परिषद को संस्थागत मध्यस्थता को विनियमित करने का दायित्व सौंपा गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘लेकिन जब भारत में संस्थागत मध्यस्थता ने आकार ही नहीं लिया है, तो मध्यस्थता परिषद किसे विनियमित करेगी? अब इसने आकार ले लिया है और इसी वर्ष के भीतर प्रस्तावित परिषद का गठन हो जाएगा।’’
लेकिन, एक पूर्व केंद्रीय कानून सचिव का इससे विपरीत विचार था। पूर्व केंद्रीय कानून सचिव पी.के. मल्होत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘भारत की मध्यस्थता परिषद द्वारा संस्थागत तंत्र की स्थापना का प्रावधान 2019 में मध्यस्थता अधिनियम में संशोधन करके किया गया था। छह साल से अधिक समय बीत चुका है और प्रस्तावित परिषद का गठन अभी तक नहीं हुआ है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र बनाने के प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि संस्थागत तंत्र उपलब्ध होने पर संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा मिलेगा, इतना ही नहीं, परिषद के अस्तित्व में होने से भी संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा मिलेगा।
मल्होत्रा ने कहा कि देश में प्रचलित तदर्थ मध्यस्थता अधिक समस्याएं पैदा कर रही है और यही कारण है कि कुछ सरकारी विभाग भी मध्यस्थता प्रणाली से बाहर निकलकर विवादों के निपटारे के लिए सुलह को एक अन्य साधन के रूप में अपना रहे हैं।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कई मौकों पर अफसोस जताया है कि मध्यस्थता के भारतीय संस्कृति का हिस्सा होने के बावजूद, यह अवधारणा कहीं न कहीं ‘बिगड़’ गई और अन्य देश अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के केंद्र बन गए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के नये केंद्र के रूप में उभरेगा।
पिछले साल फरवरी में पूर्व कानून सचिव टी. के. विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति ने मध्यस्थता क्षेत्र में सुधारों पर अपनी रिपोर्ट कानून मंत्रालय को सौंपी थी।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

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