नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में 16वें वित्त आयोग ने एक अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत बरकरार रखने की सिफारिश की है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में 2026-2031 के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर हस्तांतरण पर 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पेश की।
सीतारमण ने कहा, ‘‘सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रखने की आयोग की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है।’’
केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के अनुदानों के तौर पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। इनमें ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय तथा आपदा प्रबंधन अनुदान शामिल हैं।
संविधान के तहत गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच कर के बंटवारे का एक फॉर्मूला देता है।
केंद्र द्वारा लगाए गए उपकर और अधिभार इस विभाज्य पूल का हिस्सा नहीं होते।
सोलहवें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर, 2023 को किया गया था।
पनगढ़िया के नेतृत्व वाले आयोग के सदस्यों में सेवानिवृत्त एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री मनोज पांडा, एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष, और भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर हैं।
आयोग के सचिव ऋत्विक पांडेय ने 17 नवंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
भाषा वैभव माधव
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