लघु द्वीपीय विकासशील देशों में 2000 के दशक की शुरुआत के मुकाबले सात गुना गर्मी का सामना कर रहे शिशु

लघु द्वीपीय विकासशील देशों में 2000 के दशक की शुरुआत के मुकाबले सात गुना गर्मी का सामना कर रहे शिशु

लघु द्वीपीय विकासशील देशों में 2000 के दशक की शुरुआत के मुकाबले सात गुना गर्मी का सामना कर रहे शिशु
Modified Date: July 16, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: July 16, 2026 8:14 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) लघु द्वीपीय विकासशील देशों (एसआईडीएस) में शिशुओं को अब 2000 के दशक की शुरुआत की तुलना में सात गुना अधिक उष्णलहर दिनों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि बुजुर्गों के मामले में यह आंकड़ा पांच गुना अधिक है। यह बात ‘लैंसेट’ की एक नयी रिपोर्ट में कही गई है।

लैंसेट काउंटडाउन एसआईडीएस की दूसरी वार्षिक संकेतक रिपोर्ट, जलवायु से जुड़े स्वास्थ्य पर असर, अनुकूलन, शमन, वित्त और राजनीतिक भागीदारी जैसे 28 संकेतकों पर सबूत पेश करती है।

पच्चीस शैक्षणिक संस्थानों के 30 लेखकों द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट तेज़ी से बढ़ते जोखिमों को उजागर करती है और पहले से जारी प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय समर्थन की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर देती है।

लैंसेट काउंटडाउन एसआईडीएस की क्षेत्रीय निदेशक जॉर्जिआना गॉर्डन स्ट्रैचन ने कहा, ‘‘

लघु द्वीपीय विकासशील देशों (एसआईडीएस) के लिए गर्मी स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यह रिपोर्ट बताती है कि बढ़ते तापमान से लोगों को बचाना अब जलवायु और स्वास्थ्य नीति की मुख्य प्राथमिकता होना चाहिए।’’

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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