सर्प विष मामला: न्यायालय ने यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ प्राथमिकी और कार्यवाही रद्द की

सर्प विष मामला: न्यायालय ने यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ प्राथमिकी और कार्यवाही रद्द की

सर्प विष मामला: न्यायालय ने यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ प्राथमिकी और कार्यवाही रद्द की
Modified Date: March 19, 2026 / 03:38 pm IST
Published Date: March 19, 2026 3:38 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक रेव पार्टी में कथित रूप से सांप के विष का इस्तेमाल करने के आरोप में 2023 में गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ प्राथमिकी और उसके बाद की सभी कार्यवाहियों को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया और कहा कि यह मामला कानून के तहत कहीं नहीं टिकता।

न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वह अपने विचार को दो विशिष्ट प्रश्नों तक सीमित रख रही है – स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 की धारा 2(23) की प्रयोज्यता और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 55 के तहत कार्यवाही की वैधता।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने अधिकृत प्राधिकारी को यह स्वतंत्रता दी कि वह वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 55 के तहत उचित शिकायत दायर करके कानून के अनुसार उचित कार्यवाही शुरू कर सकता है।

यादव के खिलाफ मामला 22 नवंबर 2023 को दर्ज किया गया था और उन्हें 17 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यादव के खिलाफ प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत लगाए गए अपराध गुरुग्राम में पूर्व में दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित थे, जिसमें पहले ही ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल की जा चुकी है।

खंडपीठ ने कहा कि यादव के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है, और आरोप पत्र में केवल यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने मित्रों के माध्यम से मनोरंजन के उद्देश्य से सांप के विष के ऑर्डर दिए थे। उनके ये मित्र इस मामले में सह आरोपी हैं।

खंडपीठ ने कहा कि स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि सह आरोपियों से बरामद तरल पदार्थ अनुसूची में वर्णित निर्धारित पदार्थ के अंतर्गत नहीं आता।

वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम लगाए जाने पर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि धारा 55 यह निर्धारित करती है कि अभियोजन केवल एक अधिकृत अधिकारी द्वारा दायर शिकायत के माध्यम से ही शुरू किया जा सकता है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में शिकायतकर्ता भारत के वन्य जीव बोर्ड का पूर्व कर्मचारी है और इसलिए अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराने के लिए अधिकृत व्यक्ति नहीं है।

न्यायालय ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यादव के खिलाफ मामला कानून के तहत टिक नहीं सकता और इसीलिए प्राथमिकी और उसके बाद की सभी कार्यवाहियों को रद्द किया जाता है, जिसमें आरोपपत्र दाखिल करना और निचली अदालत के संज्ञान आदेश शामिल हैं।

विवादित यूट्यूबर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें आरोप पत्र और निचली अदालत के संज्ञान आदेश को खारिज करने से इनकार किया गया था, और इसे गंभीर अपराध करार दिया गया था।

इससे पहले न्यायालय ने 18 फरवरी को सांप के विष मामले में यादव के खिलाफ वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत दायर शिकायत की जांच करने का संकेत दिया था और कहा था कि यदि लोकप्रिय व्यक्तियों को सांप जैसे ‘‘बेजुबान पीड़ितों’’ का उपयोग करने की अनुमति दी गई, तो यह समाज को एक ‘बहुत ही गलत संदेश’ दे सकता है।

पिछले साल छह अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में यादव के खिलाफ निचली अदालत में जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

भाषा शोभना नरेश

नरेश


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