बुजुर्गों के कल्याण के लिए समाज और परिवारों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी: केरल बुजुर्ग आयोग के अध्यक्ष

बुजुर्गों के कल्याण के लिए समाज और परिवारों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी: केरल बुजुर्ग आयोग के अध्यक्ष

बुजुर्गों के कल्याण के लिए समाज और परिवारों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी: केरल बुजुर्ग आयोग के अध्यक्ष
Modified Date: September 23, 2026 / 12:24 pm IST
Published Date: September 23, 2026 12:24 pm IST

कन्नूर (केरल), 23 सितंबर (भाषा) केरल राज्य बुजुर्ग आयोग के अध्यक्ष के. सोमप्रसाद ने कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों को मुख्य रूप से अपने ही परिवारों के भीतर समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उनका कल्याण तभी संभव है जब समाज और परिवारों की मानसिकता में बदलाव आए।

जिला प्रशासन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सोमप्रसाद यहां कलेक्ट्रेट अनुसंधान संभाग (कलेक्टर एस्टेट) के सम्मेलन कक्ष में आयोजित आयोग की बैठक के दौरान शिकायतों की समीक्षा के बाद बोल रहे थे।

वर्तमान में विभिन्न जिलों से बुजुर्गों के लिए न्याय की मांग करने वाली कई शिकायतें आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जा रही हैं।

सोमप्रसाद ने उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा 2007 में पारित कानून के आधार पर बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) स्थापित किए गए हैं, जिनमें राजस्व विभागीय अधिकारी (आरडीओ) पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि शिकायतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्तमान में न्यायाधिकरण की संख्या (27) नाकाफी है। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए समर्पित न्यायाधिकरण जैसे वैकल्पिक तंत्र का सुझाव दिया।

सोमप्रसाद ने आगे कहा कि कानून में बच्चों को हस्तांतरित की गई संपत्ति को वापस लेने का प्रावधान है यदि वे अपने माता-पिता की देखभाल करने में विफल रहते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य उसके सामने आने वाली शिकायतों का जल्द से जल्द निपटारा करना है।

केरल भारत का पहला राज्य है जिसने केरल वरिष्ठ नागरिक आयोग अधिनियम, 2025 के तहत एक समर्पित ‘केरल राज्य बुजुर्ग आयोग’ स्थापित किया है।

भाषा

मनीषा रंजन

रंजन


लेखक के बारे में