नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि देश के कई हिस्सों में रासायनिक उर्वरकों और पानी के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर में चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है और ‘मिलेट्स मिशन’ सहित कई योजनाएं चला रही है।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से मोटे अनाज (श्रीअन्न), दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
चौहान ने कहा, “रासायनिक उर्वरकों और पानी के अधिक उपयोग के कारण कई स्थानों पर मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है।”
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मोटे अनाज का रकबा और उत्पादन बढ़ा है तथा उम्मीद है कि इसका उत्पादन और खपत आगे और बढ़ेगी।
मंत्री ने पंजाब के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “पंजाब को प्रणाम करते हैं, पंजाब के किसानों को प्रणाम करते हैं। प्रदूषण के लिए केवल किसान जिम्मेदार नहीं हैं। पंजाब के किसान फसल अवशेष प्रबंधन भी कर रहे हैं।’’
एक लिखित उत्तर में चौहान ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू कर रहा है, जिनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत मोटे अनाज (श्रीअन्न) की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम 28 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है, जिनमें पंजाब भी शामिल है। वर्ष 2025-26 के लिए पंजाब में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने हेतु 34.60 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत फसल विविधीकरण कार्यक्रम (सीडीपी) हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे हरित क्रांति वाले राज्यों में लागू किया जा रहा है, ताकि धान जैसी अधिक पानी खपत वाली फसलों से हटकर वैकल्पिक फसलों—मोटे अनाज, दलहन, तिलहन आदि—की ओर रुझान बढ़ाया जा सके।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में पंजाब के लिए 103.75 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना स्वीकृत की गई है, जिसका उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश