समय पर न्याय के लिए आतंकवाद और संगठित अपराध से संबंधित विशेष अदालतें जरूरी : न्यायमूर्ति सूर्यकांत
समय पर न्याय के लिए आतंकवाद और संगठित अपराध से संबंधित विशेष अदालतें जरूरी : न्यायमूर्ति सूर्यकांत
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने आतंकवाद-रोधी एवं मादक पदार्थ निवारण और संगठित अपराध निरोधक कानूनों के तहत दर्ज मामलों के लिए सोमवार को विशेष अदालतों की शुरुआत की।
इस अवसर पर सीजेआई ने कहा कि इससे समय पर न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी तथा तेजी से जटिल हो रहे मुकदमों से निपटने वाली आपराधिक न्याय प्रणाली की क्षमता मजबूत होगी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां राउज एवेन्यू अदालत परिसर में इन विशेष अदालतों के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि न्याय तक सार्थक पहुंच का मतलब केवल अदालत जाने की क्षमता होना नहीं है, बल्कि यह आश्वासन भी है कि मामलों का फैसला एक उचित समय सीमा के भीतर ऐसी अदालतों द्वारा किया जाएगा, जो उन मामलों की जटिलता से निपटने में सक्षम हों।
सीजेआई ने कहा, ‘‘देश की राजधानी के रूप में इसने (दिल्ली ने) अक्सर उन सुधारों का नेतृत्व किया है, जिन्होंने देशभर में न्याय वितरण प्रणाली को आकार दिया है। चाहे वह तकनीकी प्रगति हो या अदालत प्रशासन में सुधार, कई परिवर्तनकारी पहलों ने देश में अन्य जगहों पर इसी तरह के प्रयासों को प्रेरित करने से पहले यहीं आकार लिया है।’’
ये विशेष अदालतें विशेष रूप से राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।
उन्होंने कहा कि मामलों में देरी से पीड़ितों के लिए अनिश्चितता का समय लंबा हो जाता है, विचाराधीन कैदियों को अपनी आजादी के लिए फैसलों का इंतजार करना पड़ता है और समय बीतने के साथ सबूत भी कमजोर हो जाते हैं।
सीजेआई ने कहा, ‘‘इन विशेष अदालतों की स्थापना इसी दर्शन पर आधारित है। यह इस बात को पूरी तरह स्वीकार करती है कि न्याय तक सार्थक पहुंच एक ऐसी न्याय वितरण प्रणाली पर निर्भर करती है, जो जटिल मामलों का फैसला योग्यता, निरंतरता और उचित समय के भीतर करने में सक्षम हो।’’
उन्होंने यह भी कहा कि मामलों का समय पर निपटारा करना केवल एक प्रशासनिक उद्देश्य नहीं, बल्कि यह न्याय का ही एक अनिवार्य हिस्सा है।
सीजेआई ने कहा कि विशेष अदालतों से न्यायाधीशों को संबंधित मामलों में विशेषज्ञता हासिल करने, सुनवाई में निरंतरता बनाए रखने और मुकदमों के प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे निष्पक्षता और उचित कानूनी प्रक्रिया के सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए जटिल मुकदमों की कार्यवाही अधिक कुशलता से आगे बढ़ सकेगी।
उन्होंने इस पहल की सफलता के लिए न्यायाधीशों, जांच एजेंसियों, सरकारी वकीलों, वकीलों और अदालत के कर्मचारियों के बीच सहयोग की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
इस परियोजना पर भरोसा जताते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में मिले अनुभव का इस्तेमाल देशभर में ऐसी ही विशेष अदालतों के लिए एक मॉडल के तौर पर किया जा सकता है, जिससे लंबित मामलों की संख्या कम करने और मुकदमों में ज़्यादा निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इस समारोह में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय, न्यायमूर्ति ज्योति सिंह और राउज़ एवेन्यू अदालत परिसर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट भी शामिल हुए।
भाषा
सुरेश दिलीप
दिलीप

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