रफ्तार रोमांचित करती है, लेकिन जान लेती है: मोटोजीपी के असर को लेकर नोएडा सड़क सुरक्षा स्वयंसेवक

रफ्तार रोमांचित करती है, लेकिन जान लेती है: मोटोजीपी के असर को लेकर नोएडा सड़क सुरक्षा स्वयंसेवक

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  • Publish Date - September 23, 2023 / 10:33 PM IST,
    Updated On - September 23, 2023 / 10:33 PM IST

(फोटो के साथ)

(किशोर द्विवेदी)

नोएडा, 23 सितंबर (भाषा) ‘हेलमेट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर राघवेंद्र कुमार हैरानी जताते हुए सवाल करते हैं कि पूरे भारत में तेज गति से वाहन चलाने के कारण हर साल हजारों युवा सड़कों पर अपनी जान गंवा देते हैं, ऐसे में मोटोजीपी रेस का आयोजन क्यों किया जा रहा है। इस रेस के दौरान 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बाइक चलाई जाती है।

कुमार सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए नियमित रूप से एक स्वयंसेवक के रूप में नोएडा यातायात पुलिस के साथ सहयोग करते हैं। 2014 में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर एक दुर्घटना में उन्होंने अपने एक दोस्त को खो दिया। उनके दोस्त ने मोटरसाइकिल चलाते समय हेलमेट नहीं पहना था।

इस घटना से कुमार पर इतना असर पड़ा कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और सड़क सुरक्षा को लेकर जागरुकता फैलाने लगे। अब तक, उन्होंने 56,000 से अधिक हेलमेट वितरित किए हैं, जिससे उन्हें ‘हेलमेट मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाने लगा है।

‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा कार्यक्रम आयोजकों के प्रतिनिधियों से टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया लेकिन जवाब नहीं मिला। कुमार ने कहा, ‘‘मोटोजीपी रेस 30 देशों में होती है। भारत इस सूची में 31वां देश बन जाएगा। लेकिन इससे हमें क्या हासिल हो रहा है? नाम या लाभ? यह हाई-स्पीड बाइक रेस उस देश में हो रही है जहां दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।’’

कुमार ने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि हम रेस को होने से नहीं रोक सकते। लेकिन देश की जनता को ये संदेश जाना चाहिए कि उन्हें इस आयोजन में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। ऐसे देश में जहां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की ऊपरी गति सीमा निर्धारित होने के बावजूद हर साल 1.50 लाख लोग, जिनमें बड़ी संख्या में युवा होते हैं, सड़क पर दम तोड़ देते हैं, हम 350 किलोमीटर प्रति घंटे के शो का जश्न क्यों मना रहे हैं?’’

सामाजिक और सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने दावा किया कि सड़क सुरक्षा को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सरकारी अधिकारियों और पुलिस द्वारा ‘‘सबसे अधिक नजरअंदाज’’ किया जाता है।

मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते ही जिले में आठ लोगों की मौत हो गई है और घटना के शिकार लोग यो तो पैदल यात्री थे या दोपहिया वाहनों पर सवार थे।

गुप्ता ने कहा, ‘‘गौतम बुद्ध नगर जिले में हर साल लगभग 400 मौतें दर्ज की जाती हैं। हम मोटोजीपी का जश्न कैसे मना सकते हैं, यह जानते हुए भी कि शहर की सड़कों पर रोजाना कम से कम एक व्यक्ति अपनी जान गंवा रहा है?’’

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश