नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के मछुआरों को श्रीलंका की नौसेना द्वारा अपने जल क्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में पकड़े जाने पर चिंता जताते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम के तिरुचि शिवा ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि दो दशकों से अधिक समय से चली आ रही इस समस्या का आज तक कोई समाधान नहीं निकाला जा सका है।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए शिवा ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र में कोई स्पष्ट सीमा रेखा नहीं है और आए दिन वहां की नौसेना हमारे मछुआरों को अपने जल क्षेत्र में मछली पकड़ने का आरोप लगाते हुए पकड़ लेती है।
उन्होंने कहा कि यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, मछुआरों को श्रीलंका की जेलों में बंद कर दिया जाता है और उनकी नौकाएं जब्त कर ली जाती हैं।
शिवा ने कहा कि करीब दो दशकों से अधिक समय से सदन में यह मुद्दा उठाया जाता है लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं मिला।
द्रमुक सदस्य ने कहा ‘‘मछुआरों को डर लगता है लेकिन अपनी आजीविका के लिए उन्हें समुद्र में जाना पड़ता है। सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और श्रीलंका सरकार के समक्ष इसे उठाते हुए इसका समाधान करे। ’’
भाजपा की धर्मशीला गुप्ता ने मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा करने पर इसके साहित्य, शोध, शिक्षण एवं संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा केवल बिहार या मिथिलांचल तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्राचीन भाषा अपने हजारों साल पुराने इतिहास के साथ लोक संस्कृति में व्यापक योगदान देती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ जैसी भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। ‘‘इसकी शास्त्रीय विशेषताएं और महत्व को देखते हुए मैथिली भाषा को सरकार यथाशीघ्र शास्त्रीय भाषा का दर्जा दे।’’
बीजू जनता दल के सुभाशीष खूंटिया ने जगन्नाथ मंदिर की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए आते हैं और वहां भीड़ रहती है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में इस मंदिर को विस्फोट से उड़ाने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि मंदिर की सुरक्षा को पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि मंदिर में भीड़ के नियंत्रण के लिए भी आधुनिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
खूंटिया ने कहा ‘‘मुझे भी जान की धमकी दी गई। मैं एक जन प्रतिनिधि हूं और यह एक जन प्रतिनिधि की सुरक्षा का मामला है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।’’
भाषा
मनीषा अविनाश
अविनाश