स्टालिन ने प्रधानमंत्री से किया नीट से छूट और अंकों के आधार पर प्रवेश की अनुमति देने का आग्रह

Ads

स्टालिन ने प्रधानमंत्री से किया नीट से छूट और अंकों के आधार पर प्रवेश की अनुमति देने का आग्रह

  •  
  • Publish Date - May 15, 2026 / 11:05 AM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 11:05 AM IST

चेन्नई, 15 मई (भाषा) तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि वह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) अधिनियम, 2019 की धारा 14 में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश जारी करें ताकि 2026-2027 शैक्षणिक वर्ष के लिए नीट परीक्षा से छूट दी जा सके।

स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को यह अनुमति भी दे कि वे छात्रों को योग्यता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश दें।

स्टालिन ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर ‘‘बार-बार की विफलताओं, प्रणालीगत कमजोरियों और बढ़ते जन अविश्वास पर गहरी चिंता’’ जतायी। खासतौर पर व्यापक पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक होने के बाद नीट-यूजी 2026 रद्द किए जाने को उन्होंने बेहद गंभीर बताया।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में नीट-यूजी 2026 को रद्द किया जाना एक बार फिर यह उजागर करता है कि अत्यधिक केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली में गहरी संरचनात्मक खामियां मौजूद हैं।’’

उन्होंने कहा कि तीन मई को आयोजित परीक्षा को रद्द करना पड़ा क्योंकि 400 से अधिक सवालों वाला एक ‘‘गेस पेपर’’ परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों में व्यापक रूप से प्रसारित हो गया था। इसमें जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान के 120 से अधिक प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से यह कोई अकेली घटना नहीं है। नीट और उससे पहले की परीक्षाओं का इतिहास लगातार अनियमितताओं से भरा रहा है। 2015 में नीट परीक्षा ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट में ब्लूटूथ आधारित नकल उपकरणों और संगठित गिरोहों के जरिए बड़े पैमाने पर प्रश्न पत्र लीक हुआ था।’’

इसके बाद उच्चतम न्यायालय को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, जिसका असर लगभग छह लाख छात्रों पर पड़ा था।

स्टालिन ने कहा कि परीक्षा केंद्रों के आवंटन और बुनियादी ढांचे की कमियां भी संकट को और बढ़ाती हैं। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के छात्रों को बार-बार आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दूर-दराज राज्यों में परीक्षा केंद्र दिए गए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर यात्रा और ठहरने का भारी बोझ पड़ा।

उन्होंने दावा किया कि परीक्षा को योग्यता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के माध्यम के रूप में पेश किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग रही।

भाषा गोला शोभना

शोभना